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ज्येष्ठ मास: प्रारम्भ तिथि, महत्व, व्रत, नियम और क्या करें-न करें

Jyeshtha Maas devotional image

ज्येष्ठ मास

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास वर्ष का तीसरा महीना माना जाता है। इसका नाम ज्येष्ठा नक्षत्र से संबंधित होने के कारण पड़ा है, जबकि सामान्य बोलचाल में इसे जेठ महीना भी कहा जाता है। यह मास तप, संयम और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इस अवधि में सूर्य उपासना, स्नान, जल दान, व्रत और जप का विशेष महत्व बताया गया है। भीषण गर्मी के कारण जल से जुड़े दान—जैसे घड़ा, छाया, पंखा आदि—करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

 

ज्येष्ठ मास का विशेष और दुर्लभ संयोग

वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास सामान्य से अलग और बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। इस वर्ष ‘अधिकमास’ (पुरुषोत्तम मास) लगने के कारण यह महीना लगभग दो महीने की अवधि का होगा, जो कि एक दुर्लभ संयोग है।

वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास 02 मई से शुरू होकर 29 जून तक रहेगा। इसे निम्नलिखित तीन चरणों में विभाजित किया गया है:

  • शुद्ध (प्रथम) ज्येष्ठ: 02 मई 2026 से 16 मई 2026 तक।

  • अधिक ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम मास): 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक। (यह अवधि आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वाधिक फलदायी मानी जाती है।)

  • शुद्ध (द्वितीय) ज्येष्ठ: 16 जून 2026 से 29 जून 2026 तक।

विशेष नोट: इस पूरी अवधि के दौरान सूर्यदेव वृषभ राशि में स्थित रहते हैं, जिससे गर्मी अपने चरम पर होती है। अधिकमास के जुड़ जाने से इस समय किए गए तप, संयम और दान-पुण्य का आध्यात्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।

 ज्येष्ठ मास की प्रमुख कथा (गंगा अवतरण)

ज्येष्ठ मास की सबसे प्रसिद्ध कथा माँ गंगा के धरती पर आगमन से जुड़ी है:

माना जाता है कि राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि (गंगा दशहरा) को माँ गंगा स्वर्ग से शिव जी की जटाओं में और फिर पृथ्वी पर उतरी थीं। पृथ्वी का ताप शांत करने और पितरों की मुक्ति के लिए गंगा का आना इस महीने की सबसे पवित्र घटना मानी जाती है।

 ज्येष्ठ मास का महत्व

इस महीने का आध्यात्मिक महत्व त्याग और जल संरक्षण पर आधारित है:

  1. जल की पूजा (वरुण देव)

चूंकि यह साल का सबसे गर्म महीना है, इसलिए इस समय जल का दान और संरक्षण सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। निर्जला एकादशी इसी महीने आती है, जो सिखाती है कि बिना पानी के जीवन कितना कठिन है।

  1. सूर्य की उपासना

ज्येष्ठ में सूर्य अपनी पूर्ण शक्ति में होते हैं। इस समय सूर्य को अर्घ्य देना और उनकी साधना करना स्वास्थ्य और आत्मविश्वास बढ़ाता है।

  1. हनुमान जी की भक्ति (बड़ा मंगल)

उत्तर भारत (विशेषकर उत्तर प्रदेश) में ज्येष्ठ मास के सभी मंगलवारों को बड़ा मंगल के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी महीने में हनुमान जी की मुलाकात भगवान राम से हुई थी।

 

 मान्यताएं और नियम (Dos & Don’ts)

इस महीने के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं:

श्रेणी

क्या करें

क्या न करें

भोजन/पानी

ठंडे पेय पदार्थ, बेल का शरबत और घड़े का पानी दान करें।

दोपहर के समय गरिष्ठ (भारी) भोजन से बचें।

दान

पंखा, छाता, चप्पल और अन्न का दान शुभ है।

जल की बर्बादी बिल्कुल न करें।

विहार

दोपहर में बाहर निकलने से बचें; ठंडे स्थान पर विश्राम करें।

मान्यता है कि ज्येष्ठ के महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता।

विशेष मान्यता: इस महीने के बारे में कहा गया है कि ज्येष्ठ मास में दोपहर में चलना या काम करना शरीर के लिए कष्टकारी हो सकता है, इसलिए इसे धैर्य और संयम से बिताने की सलाह दी जाती है।

 

 प्रमुख त्यौहार और व्रत

  • गंगा दशहरा: माँ गंगा का पृथ्वी पर आगमन।
  • निर्जला एकादशी: बिना पानी पिए रखा जाने वाला सबसे कठिन व्रत।
  • वट सावित्री व्रत: अखंड सौभाग्य के लिए वट वृक्ष की पूजा।
  • शनि जयंती: शनि देव का जन्मोत्सव।
  • बड़ा मंगल: हनुमान जी की विशेष पूजा।

ज्येष्ठ मास– FAQs

प्रश्न 1: ज्येष्ठ मास 2026 कब से कब तक है?
उत्तर 1: वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास 02 मई 2026 से 29 जून 2026 तक रहेगा। इस बार अधिकमास के कारण इसकी अवधि लगभग दो महीने की है।

प्रश्न 2: ज्येष्ठ मास क्यों विशेष है?
उत्तर 2: इस वर्ष ज्येष्ठ मास में अधिकमास (17 मई से 15 जून 2026) पड़ रहा है, जिससे यह मास और अधिक पवित्र और फलदायी माना जाता है।

प्रश्न 3: ज्येष्ठ मास को जेठ महीना क्यों कहते हैं?
उत्तर 3: इस मास का संबंध ज्येष्ठा नक्षत्र से है, इसलिए इसे ज्येष्ठ मास कहा जाता है, जबकि बोलचाल में इसे जेठ महीना कहते हैं।

प्रश्न 4: ज्येष्ठ मास में अधिकमास क्या होता है?
उत्तर 4: अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) वह अतिरिक्त महीना होता है जो चंद्र-सौर पंचांग के संतुलन के लिए जोड़ा जाता है। यह भक्ति, जप, तप और दान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

प्रश्न 5: ज्येष्ठ मास का धार्मिक महत्व क्या है?
उत्तर 5: यह मास सूर्य उपासना, जल दान, व्रत और तप के लिए विशेष माना जाता है। इस समय किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है।

प्रश्न 6: ज्येष्ठ मास में कौन-कौन से प्रमुख व्रत और त्योहार आते हैं?
उत्तर 6: इस महीने में प्रमुख व्रत-त्योहार हैं:
👉 गंगा दशहरा
👉 निर्जला एकादशी
👉 वट सावित्री व्रत
👉 शनि जयंती
👉 बड़ा मंगल (हनुमान पूजा)

प्रश्न 7: ज्येष्ठ मास में गंगा दशहरा क्यों मनाया जाता है?
उत्तर 7: मान्यता है कि इस दिन माँ गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, जिससे पापों का नाश और पितरों की मुक्ति होती है।

प्रश्न 8: ज्येष्ठ मास में क्या दान करना चाहिए?
उत्तर 8: इस महीने में जल, घड़ा, पंखा, छाता, चप्पल और अन्न का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

प्रश्न 9: ज्येष्ठ मास में क्या नहीं करना चाहिए?
उत्तर 9: इस महीने में जल की बर्बादी, दोपहर में अधिक धूप में निकलना और भारी भोजन करना से बचना चाहिए।

प्रश्न 10: ज्येष्ठ मास में सूर्य उपासना का क्या महत्व है?
उत्तर 10: इस समय सूर्यदेव अपनी प्रबल स्थिति में होते हैं। उन्हें अर्घ्य देने से स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

|| हरे कृष्ण ||

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