Spread the love

गोवत्स द्वादशी: जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और महत्व

गोवत्स द्वादशी का पर्व बृहस्पतिवार, 5 नवम्बर 2026 को मनाया जाएगा।

  • प्रदोषकाल गोवत्स द्वादशी मुहूर्त: सायं 05:33 बजे से रात्रि 08:10 बजे तक
  • अवधि: 02 घंटे 37 मिनट
  • द्वादशी तिथि प्रारम्भ: 5 नवम्बर 2026 को प्रातः 10:35 बजे
  • द्वादशी तिथि समाप्त: 6 नवम्बर 2026 को प्रातः 10:30 बजे

गोवत्स द्वादशी (Govatsa Dwadashi) दिवाली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। इसे कई जगहों पर बछ बारस (Bach Baras) या वसु बारस (Vasu Baras) भी कहा जाता है।

यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है। यह रमा एकादशी के अगले दिन और धनतेरस से एक दिन पहले आता है।

यहाँ गोवत्स द्वादशी की कथा, महत्व और मान्यताओं का विस्तृत विवरण है:

गोवत्स द्वादशी व्रत में गौ माता और बछड़े की पूजा

गोवत्स द्वादशी क्या है?

इस दिन गाय (Gau) और उसके बछड़े (Vatsa) की पूजा की जाती है।

‘गो’ का अर्थ गाय और ‘वत्स’ का अर्थ बछड़ा (बेटा/बच्चा) है। यह व्रत माताएं अपनी संतान (विशेषकर पुत्र) की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। साथ ही, यह भारतीय संस्कृति में गाय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। इस दिन गाय का दूध, गेहूं और कटे हुए फलों का सेवन वर्जित होता है।

 

पौराणिक कथा (गेहूंला बछड़े की कहानी)

गोवत्स द्वादशी से जुड़ी सबसे प्रचलित लोक कथा एक भूल और चमत्कार की है:

कथा: प्राचीन काल में एक सास और बहू रहती थीं। उनके पास एक गाय और उसका बछड़ा था। बछड़े का नाम गेहूंला था। एक दिन सास ने खेत पर जाते समय बहू से कहा, बहू! आज गेहूंलापका लेना।” सास का मतलब था कि गेहूं की कोई डिश (धान) पका लेना। लेकिन बहू ने गलती से बात का उल्टा अर्थ निकाल लिया। उसने गाय के बछड़े (गेहूंला) को ही काटकर पका दिया।

शाम को जब सास लौटी और गाय वापस आई, तो गाय अपने बछड़े को ढूंढते हुए रंभाने (रोने) लगी। सास ने बहू से पूछा, गेहूंला कहाँ है?” बहू ने डरते हुए कहा, मां जी, आपने ही तो कहा था कि गेहूंला पका लेना, मैंने उसे पका दिया।”

यह सुनकर सास के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने सोचा कि आज ‘गोवत्स द्वादशी’ के पवित्र दिन गौ-हत्या का पाप लग गया। दोनों सास-बहू ने रोते हुए गौ माता से क्षमा मांगी और भगवान से प्रार्थना की कि बछड़ा वापस आ जाए। उन्होंने उस हांडी (बर्तन) को, जिसमें बछड़ा पकाया था, जमीन में गाड़ दिया।

गाय अपने बछड़े की पुकार सुनकर उस जगह गई और जमीन को अपने पैरों से खोदने लगी। तभी ईश्वर के चमत्कार से बछड़ा ‘गेहूंला’ मिट्टी से जीवित बाहर निकल आया। तभी से माताएं अपनी संतान की रक्षा के लिए यह व्रत करती हैं और इस दिन गेहूं और चाकू का प्रयोग नहीं करतीं।

 

गोवत्स द्वादशी का महत्व (Significance)

  1. 33 कोटि देवता: धर्मग्रंथों के अनुसार, गाय के शरीर में 33 कोटि (प्रकार) देवी-देवताओं का वास होता है। इस दिन गाय की पूजा करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद एक साथ मिल जाता है।
  2. संतान सुख: जिसे ‘बछ बारस’ कहते हैं, यह व्रत संतान की अकाल मृत्यु और रोगों से रक्षा करता है।
  3. दिवाली का आरंभ: महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसे ‘वसु बारस’ कहते हैं और यहीं से दिवाली के दीये जलाने की शुरुआत होती है। यह ‘नंदिनी’ (कामधेनु की पुत्री) की पूजा का पर्व है।

मान्यताएं और पूजा विधि (Rituals & Beliefs)

इस व्रत के नियम बहुत विशिष्ट और कड़े होते हैं:

क. चाकू का त्याग (No Knife Usage): इस दिन चाकू से कटी हुई कोई भी चीज खाना वर्जित है। महिलाएं वही सब्जियां या अनाज बनाती हैं जिन्हें चाकू से काटने की जरूरत न हो (जैसे अंकुरित मूंग, मोठ या साबुत अनाज)।

ख. भोजन का नियम (Dietary Rules):

  • इस दिन गेहूं और गाय का दूध (या दही/घी) खाना मना होता है।
  • भोजन में बाजरा, मक्का, ज्वार या चने (बेसन) का प्रयोग किया जाता है। दूध के लिए भैंस या बकरी के दूध का उपयोग किया जा सकता है।

ग. पूजा विधि:

  1. सुबह स्नान करके गाय और बछड़े को नहलाएं।
  2. उन्हें नए वस्त्र ओढ़ाएं और फूलों की माला पहनाएं।
  3. गाय-बछड़े के माथे पर हल्दी और कुमकुम का तिलक लगाएं।
  4. उन्हें भोजन में भीगा हुआ बाजरा, मोठ और चने की दाल खिलाएं।
  5. यदि शहर में गाय न मिले, तो मिट्टी की गाय-बछड़े की मूर्ति बनाकर या चांदी की गाय की पूजा की जाती है।

घ. कहानी सुनना: शाम को महिलाएं एक साथ बैठकर बछ बारस की कहानी सुनती हैं और बाजरे की रोटी का प्रसाद ग्रहण करती हैं।

 

निष्कर्ष

गोवत्स द्वादशी मनुष्य और प्रकृति (पशुधन) के बीच प्रेम का उत्सव है। यह संदेश देता है कि त्यौहार केवल अपनी खुशी के लिए नहीं, बल्कि उन बेजुबान जीवों के सम्मान के लिए भी हैं जो हमारे जीवन का आधार हैं।

|| हरे कृष्ण ||

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top