गुरु नानक जयंती: प्रकाश पर्व, इतिहास, शिक्षाएं और धार्मिक महत्व
गुरु नानक देव जी की 557वीं जयंती (प्रकाश पर्व) मंगलवार, 24 नवम्बर 2026 को मनाई जाएगी।
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 23 नवम्बर 2026 को रात्रि 11:42 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 24 नवम्बर 2026 को रात्रि 08:23 बजे
भारत की पावन भूमि पर कई ऐसे महान संतों और महापुरुषों ने जन्म लिया है, जिन्होंने समाज को अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर मोड़ा। इन्हीं महान विभूतियों में से एक थे सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु- श्री गुरु नानक देव जी।
गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस को पूरे विश्व में अत्यंत हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ ‘गुरु नानक जयंती’, ‘गुरुपर्व’ (Gurpurab) या ‘प्रकाश पर्व’ (Prakash Parv) के रूप में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पावन पर्व हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि (देव दीपावली के दिन) को मनाया जाता है। आइए, सत्य और मानवता का मार्ग दिखाने वाले इस महापर्व के अर्थ, गुरु नानक जी की जीवन कथा, उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं (महत्व) और इससे जुड़ी मान्यताओं को विस्तार से समझते हैं।
गुरु नानक जयंती को ‘प्रकाश पर्व’ क्यों कहा जाता है?
सिख धर्म की परंपराओं के अनुसार, गुरुओं के अवतरण (जन्म) या शहादत दिवस को ‘गुरुपर्व’ कहा जाता है। जब गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था, तब समाज में अज्ञानता, अंधविश्वास, छुआछूत और धार्मिक भेदभाव का गहरा अंधकार छाया हुआ था।
गुरु नानक देव जी ने अपने दिव्य ज्ञान, सत्य और मानवता के संदेशों से इस अज्ञानता के अंधकार को चीरकर समाज में नई रोशनी (प्रकाश) फैलाई। इसी वैचारिक और आध्यात्मिक ज्ञान के उजाले का सम्मान करने के लिए उनके जन्म दिवस को ‘प्रकाश पर्व’ या ‘प्रकाश उत्सव’ कहा जाता है।
इस पावन अवसर पर सभी गुरुद्वारों को सुंदर दीपों और रोशनी से सजाया जाता है, शबद-कीर्तन की गूंज होती है और बिना किसी जाति-पाति या धर्म के भेदभाव के सभी श्रद्धालुओं के लिए ‘लंगर’ (निःशुल्क सामुदायिक भोजन) का भव्य आयोजन किया जाता है।
गुरु नानक देव जी का जीवन परिचय
गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत में ‘तलवंडी’ नामक गाँव में हुआ था। वर्तमान में यह ऐतिहासिक और पवित्र स्थान पाकिस्तान में स्थित है, जिसे गुरु जी के सम्मान में ‘ननकाना साहिब’ (Nankana Sahib) के नाम से जाना जाता है।
पिता का नाम: कल्याण चंद दास बेदी (जिन्हें प्यार से कालू मेहता कहा जाता था)
माता का नाम: माता तृप्ता देवी
बचपन से ही गुरु नानक जी अन्य बच्चों से बिल्कुल अलग थे। उनका मन सांसारिक खेलों या कार्यों में नहीं लगता था, बल्कि वे हमेशा ईश्वर की भक्ति, गहन ध्यान और आध्यात्मिक चिंतन में लीन रहते थे।
जीवन की दिशा बदलने वाली दो प्रमुख घटनाएं
गुरु नानक देव जी के जीवन काल में कई चमत्कारिक और प्रेरणादायक घटनाएं घटीं, जिनमें से दो सबसे प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
1. ‘सच्चा सौदा’ (Sacha Sauda) की कथा
जब नानक जी युवा हुए, तो उनके पिता कालू मेहता ने उन्हें व्यापार की बारीकियां सिखाने के लिए 20 रुपये दिए और कहा कि बाज़ार जाकर कोई “सच्चा सौदा” (खरा और लाभदायक व्यापार) करके आना।
नानक जी वे 20 रुपये लेकर बाज़ार की ओर निकले। रास्ते में जंगल के पास उन्हें कुछ साधु-संत मिले, जो कई दिनों से भूखे थे। नानक जी ने सोचा कि इन भूखे संतों को भोजन कराने से बड़ा और “सच्चा व्यापार” इस दुनिया में और क्या हो सकता है? उन्होंने उन 20 रुपयों से सारा भोजन खरीदा और साधुओं को भरपेट भोजन करा दिया।
जब वे खाली हाथ घर लौटे और पिता ने व्यापार के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि वे दुनिया का सबसे ‘सच्चा सौदा’ करके आए हैं। सिख धर्म में आज जो विशाल ‘लंगर परंपरा’ हम देखते हैं, उसकी नींव इसी ‘सच्चे सौदे’ की घटना से पड़ी थी।
2. काली बेईं नदी में ईश्वरीय ज्ञान की प्राप्ति
अपने युवावस्था में गुरु नानक जी सुल्तानपुर लोधी में काम करते थे। एक सुबह वे पास की ‘काली बेईं’ नदी में स्नान करने के लिए उतरे, लेकिन रहस्यमयी तरीके से वे तीन दिनों तक पानी से बाहर ही नहीं आए।
जब वे तीन दिन बाद नदी से बाहर निकले, तो उनके चेहरे पर एक अद्भुत तेज था; उन्हें परब्रह्म के ईश्वरीय ज्ञान की प्राप्ति हो चुकी थी। बाहर आकर उन्होंने जो सबसे पहला वाक्य कहा, वह था— “ना कोई हिंदू, ना कोई मुसलमान।”
उनका आशय था कि ईश्वर एक है और हम सभी उसी एक परवरदिगार की संतान हैं। इसके बाद उन्होंने अपना सारा जीवन समाज से पाखंड और कुरीतियों को मिटाने में लगा दिया और चार लंबी आध्यात्मिक यात्राएं कीं, जिन्हें सिख धर्म में ‘उदासियां’ कहा जाता है।
गुरु नानक देव जी की तीन अनमोल शिक्षाएं (Three Pillars of Sikhism)
गुरु नानक देव जी ने ईश्वर को प्राप्त करने का अत्यंत सरल, व्यावहारिक और गृहस्थ जीवन में रहते हुए किया जाने वाला मार्ग बताया। उनकी पूरी शिक्षाएं इन तीन मूल सिद्धांतों पर टिकी हैं:
1. नाम जपो (Naam Japo)
ईश्वर केवल एक है जिसे “इक ओंकार” कहा गया है।
मनुष्य को हर परिस्थिति में उस परमात्मा का नाम जपना चाहिए और उसका स्मरण करना चाहिए।
ईश्वर को मंदिरों या मस्जिदों में नहीं, बल्कि हर जीवित प्राणी और अपने हृदय के भीतर खोजें।
2. किरत करो (Kirat Karo)
अपना जीवन यापन हमेशा ईमानदारी और कठिन परिश्रम से करें।
बेईमानी, धोखाधड़ी या किसी का हक मारकर (अन्याय से) कमाया गया धन पाप के समान है।
अपने काम (कर्म) को ही अपनी सबसे बड़ी पूजा मानें।
3. वंड छको (Vand Chhako)
अपनी मेहनत की कमाई का कुछ हिस्सा हमेशा जरूरतमंदों और गरीबों के लिए निकालें (दसवंध)।
जो कुछ भी आपके पास है, उसे समाज के साथ बांट कर खाएं।
सेवा और दान को अपने जीवन का सबसे अभिन्न हिस्सा बनाएं।
गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) की प्रमुख परंपराएं
गुरुपर्व का यह उत्सव केवल एक दिन का नहीं होता, बल्कि इसकी तैयारियां हफ्तों पहले से शुरू हो जाती हैं:
प्रभात फेरी (Prabhat Pheri): पर्व से लगभग 15 दिन पहले अलसुबह (भोर में) गुरुद्वारों से प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं, जहां श्रद्धालु भजन और शबद-कीर्तन गाते हुए गलियों से गुजरते हैं।
अखंड पाठ (Akhand Path): गुरुपर्व से ठीक 48 घंटे पहले सभी गुरुद्वारों में सिखों के पवित्र ग्रंथ ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ का निरंतर (बिना रुके) पाठ शुरू किया जाता है।
नगर कीर्तन (Nagar Kirtan): त्योहार से एक दिन पहले एक भव्य जुलूस (नगर कीर्तन) निकाला जाता है। इसकी अगुवाई ‘पंज प्यारे’ करते हैं और इसमें सिखों की पारंपरिक मार्शल आर्ट ‘गतका’ का शानदार प्रदर्शन किया जाता है।
लंगर सेवा (Community Kitchen): प्रकाश पर्व के दिन सबसे बड़ा आकर्षण यहां का लंगर होता है। अमीर-गरीब, राजा-रंक सभी एक ही पंगत (लाइन) में जमीन पर बैठकर प्रेमपूर्वक भोजन ग्रहण करते हैं, जो समानता का सबसे बड़ा प्रतीक है।
निष्कर्ष: गुरुपर्व से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
गुरु नानक जयंती केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है; यह भाईचारे, करुणा और निस्वार्थ सेवा का एक वैश्विक उत्सव है। आज के समय में जब पूरी दुनिया स्वार्थ, धार्मिक कट्टरता और तनाव से जूझ रही है, तब गुरु नानक देव जी का संदेश हमारे लिए एक औषधि का काम करता है।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची इबादत दिखावे के कर्मकांडों में नहीं, बल्कि भूखे को भोजन कराने और एक ईमानदार जीवन जीने में है।
“इक ओंकार सतनाम, करता पुरख, निरभउ, निरवैर…”
गुरु नानक देव जी का यह प्रकाश पर्व हम सभी के जीवन के अंधकार को मिटाकर शांति, प्रेम और सद्भाव की नई रोशनी लेकर आए।
