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वैशाख मास की तिथि, महत्व, स्नान-दान, व्रत और धार्मिक नियमों की पूरी जानकारी।

हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास वर्ष का दूसरा महीना माना जाता है। इस मास का संबंध विशाखा नक्षत्र से होने के कारण इसे वैशाख मास कहा जाता है। शास्त्रों में वैशाख मास को माधव मास के नाम से भी जाना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि इसी पवित्र वैशाख मास से त्रेतायुग का आरम्भ हुआ था। इस मास में स्नान, दान, जप और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

वर्ष 2026 में वैशाख मास 03 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होकर 01 मई 2026 तक रहेगा।

Vaishakh Maas 2026 Hindu Calendar

हिन्दू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास साल का दूसरा महीना होता है। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत पवित्र माना गया है। स्कंद पुराण में तो यहाँ तक कहा गया है कि

वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है और वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं है।”

  1. वैशाख मास क्या है?

  • समय: यह चैत्र मास के बाद और ज्येष्ठ मास से पहले आता है (अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अप्रैल-मई)।
  • माधव मास: वैशाख मास को माधव मास भी कहा जाता है, क्योंकि यह भगवान विष्णु (माधव) को अत्यंत प्रिय है।
  • ऋतु परिवर्तन: इस महीने से गर्मी की शुरुआत होती है और वसंत ऋतु का समापन होता है।
  1. वैशाख मास की कथा (महत्वपूर्ण प्रसंग)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, वैशाख मास का महत्व नारद मुनि ने राजा अम्बरीष को बताया था।

  • सत्ययुग का आरम्भ: माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया (अक्षय तृतीया) को ही सत्ययुग का निर्माण किया था। इसलिए इस पूरे महीने को सृष्टि के आरंभ का प्रतीक माना जाता है।
  • भगवान विष्णु के अवतार: इसी महीने में भगवान विष्णु के कई महत्वपूर्ण अवतार हुए, जैसे परशुराम अवतार, नरसिंह अवतार और कूर्य (कछुआ) अवतार
  • पुण्य फल: कथाओं में वर्णन है कि जो व्यक्ति इस मास में सूर्योदय से पूर्व स्नान करता है और भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे राजसूय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।
  1. वैशाख मास का महत्व

वैशाख मास को मुख्य रूप से त्याग, तपस्या और दान का महीना माना जाता है:

  • जल दान का महत्व: गर्मी शुरू होने के कारण, इस महीने में प्यासों को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। प्याऊ लगवाना, पशु-पक्षियों के लिए पानी रखना और मटके का दान करना ‘अश्वमेध यज्ञ’ के समान फलदायी होता है।
  • स्नान का महत्व: वैशाख में सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदियों या जलाशयों में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
  • छाया दान: चप्पल, जूते, छाता और पंखे का दान करने की परंपरा है ताकि राहगीरों को गर्मी से राहत मिले।
  • माधव सेवा: इस पूरे महीने “ॐ माधवाय नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
  1. प्रमुख मान्यताएँ

  • अक्षय तृतीया: वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया कहते हैं। इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य या दान कभी समाप्त नहीं होता (अक्षय रहता है)।
  • मोक्ष की प्राप्ति: मान्यता है कि वैशाख मास के नियमों का पालन करने से व्यक्ति को अंत में बैकुंठ (विष्णु लोक) की प्राप्ति होती है।
  • पंचांग श्रवण: इस महीने में नया पंचांग सुनना और नए संवत की फलश्रुति सुनना शुभ माना जाता है।
  1. वैशाख मास के मुख्य त्यौहार

इस पवित्र महीने में कई बड़े त्यौहार मनाए जाते हैं:

  • अक्षय तृतीया (सोना खरीदना और दान करना शुभ)
  • परशुराम जयंती
  • नृसिंह जयंती
  • गंगा सप्तमी (इस दिन गंगा जी स्वर्ग से शिव जी की जटाओं में आई थीं)
  • बुद्ध पूर्णिमा (गौतम बुद्ध का जन्म)
  • मोहिनी एकादशी और वरुथिनी एकादशी

|| राधे-राधे ||.

 

 

 

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