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संकर्षण विनायक चतुर्थी: जानें कथा, पूजा विधि, महत्व, व्रत नियम और धार्मिक मान्यताएं

हिंदू पंचांग के अनुसार विनायक चतुर्थी 20 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।

चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 20 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा और इसका समापन 21 अप्रैल 2026 को सुबह 4 बजकर 14 मिनट पर होगा।

मध्याह्न पूजा का शुभ समय सुबह 11 बजकर 02 मिनट से दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त की कुल अवधि 2 घंटे 36 मिनट होगी।

वर्जित चन्द्रदर्शन का समय: इस दिन सुबह 7 बजकर 44 मिनट से रात 10 बजकर 20 मिनट तक चन्द्र दर्शन वर्जित माना गया है। इसकी कुल अवधि 14 घंटे 36 मिनट रहेगी।

संकर्षण विनायक चतुर्थी भगवान श्रीगणेश के बारह प्रमुख विनायक स्वरूपों में से संकर्षण विनायक की उपासना को समर्पित एक विशेष चतुर्थी मानी जाती है। इस दिन भक्त भगवान गणेश के इस स्वरूप की पूजा करके जीवन के विघ्नों को दूर करने, मानसिक शांति, ज्ञान, बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।

सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव कहा गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही की जाती है। विभिन्न पुराणों और आगम ग्रंथों में भगवान गणेश के अनेक स्वरूपों का वर्णन मिलता है, जिनमें प्रत्येक स्वरूप का अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व है। संकर्षण विनायक भी इन्हीं दिव्य रूपों में से एक हैं।

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संकर्षण विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश के संकर्षण विनायक स्वरूप

संकर्षण विनायक का अर्थ

संकर्षण शब्द संस्कृत धातु कृष् (खींचना या आकर्षित करना) से बना है। इसका अर्थ है-  दुःख, बाधाओं, नकारात्मकता और अज्ञान को दूर करके भक्त को धर्म, ज्ञान और ईश्वर की ओर आकर्षित करने वाला।

इसी कारण भगवान गणेश के इस स्वरूप को संकर्षण विनायक कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इनकी आराधना से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और साधक का मन सकारात्मकता की ओर अग्रसर होता है।

संकर्षण विनायक चतुर्थी का महत्व

संकर्षण विनायक चतुर्थी केवल व्रत का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मसंयम का भी पर्व है।

इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से श्रद्धालु-

  • कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
  • बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता प्राप्त करने की कामना करते हैं।
  • परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की मंगलकामना करते हैं।
  • शिक्षा, व्यापार और करियर में सफलता के लिए भगवान का आशीर्वाद मांगते हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक जीवन की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

संकर्षण विनायक की पौराणिक कथा

प्राचीन धार्मिक परंपराओं के अनुसार, एक समय देवताओं और ऋषियों के सामने अनेक प्रकार की विघ्न-बाधाएं उत्पन्न होने लगीं। यज्ञ, तप और धर्म-कर्म में बार-बार अवरोध आने लगे। तब सभी देवताओं ने भगवान गणेश की आराधना की और उनसे इन विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना की।

भक्तों की पुकार सुनकर भगवान गणेश संकर्षण विनायक स्वरूप में प्रकट हुए। उन्होंने अपने दिव्य तेज से समस्त विघ्नों और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त किया तथा देवताओं को पुनः धर्म और सद्कर्म के मार्ग पर स्थापित किया।

इस घटना के बाद देवताओं ने भगवान गणेश की स्तुति करते हुए प्रार्थना की कि जो भी श्रद्धालु चतुर्थी के दिन संकर्षण विनायक की पूजा करेगा, उसके जीवन से विघ्न दूर हों और उसे शुभ फल प्राप्त हों। तभी से इस स्वरूप की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है।

ध्यान दें: संकर्षण विनायक से संबंधित विस्तृत कथा प्रमुख पुराणों में सीमित रूप से उपलब्ध है। विभिन्न क्षेत्रों में इससे जुड़ी कथाएं और परंपराएं अलग-अलग रूप में प्रचलित हैं।

संकर्षण विनायक चतुर्थी पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान करें

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  1. संकल्प लें

भगवान गणेश के समक्ष व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।

  1. गणेश प्रतिमा स्थापित करें

लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

  1. पूजन सामग्री
  • दूर्वा
  • लाल पुष्प
  • सिंदूर
  • अक्षत
  • चंदन
  • धूप
  • दीप
  • नारियल
  • मोदक या लड्डू
  • फल
  • पंचामृत
  1. पूजन

भगवान गणेश को चंदन, अक्षत, पुष्प, दूर्वा और नैवेद्य अर्पित करें।

  1. मंत्र जाप

कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करें—

ॐ गं गणपतये नमः।

या

ॐ श्री संकर्षण विनायकाय नमः।

  1. आरती

पूजा के अंत में भगवान गणेश की आरती करें तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

व्रत के नियम

  • ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • क्रोध और कटु वचन से बचें।
  • असत्य न बोलें।
  • जरूरतमंदों को दान दें।
  • पशु-पक्षियों के प्रति दया रखें।

धार्मिक मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संकर्षण विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से—

  • जीवन की बाधाओं में कमी आती है।
  • मानसिक शांति प्राप्त होती है।
  • बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है।
  • परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
  • शुभ कार्यों में सफलता की प्रार्थना पूर्ण होती है।
  • भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।

संकर्षण विनायक चतुर्थी पर क्या करें?

  • गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
  • गणेश चालीसा का पाठ करें।
  • मोदक का भोग लगाएं।
  • जरूरतमंदों को अन्न दान करें।
  • मंदिर जाकर भगवान गणेश के दर्शन करें।
  • परिवार के साथ आरती करें।

क्या न करें?

  • किसी का अपमान न करें।
  • मांसाहार और नशे से दूर रहें।
  • तामसिक भोजन न करें।
  • क्रोध और विवाद से बचें।
  • पूजा के समय मन को अशांत न रखें।

निष्कर्ष

संकर्षण विनायक चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का एक पावन अवसर है। यह पर्व हमें सिखाता है कि श्रद्धा, संयम, सदाचार और भगवान में विश्वास रखने से जीवन की कठिन से कठिन बाधाओं का भी सामना किया जा सकता है। भगवान गणेश के संकर्षण विनायक स्वरूप की आराधना हमें केवल बाहरी विघ्नों से ही नहीं, बल्कि मन के भीतर छिपे भय, भ्रम और नकारात्मक विचारों से भी मुक्त होने की प्रेरणा देती है।

यदि श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ इस व्रत का पालन किया जाए, तो भगवान गणेश की कृपा से जीवन में मंगल, शांति, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

|| जय जय श्री गणेश ||

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