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सीता नवमी 2026 कब है? जानें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, माता सीता के जन्मोत्सव का महत्व और इस दिन किए जाने वाले धार्मिक नियम।

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सीता नवमी 2026 तिथि 

हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 24 अप्रैल 2026 को शाम 07 बजकर 21 मिनट पर प्रारम्भ होगी और 25 अप्रैल 2026 को शाम 06 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी।

उदयातिथि के अनुसार सीता नवमी 25 अप्रैल, SHANIVAR को मनाई जाएगी।

सीता नवमी मध्याह्न पूजा का मुहूर्त:
सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।
पूजा की कुल अवधि 02 घंटे 36 मिनट है

श्री जानकी नवमी: परिचय, कथा, महत्व और मान्यता

श्री जानकी नवमी, जिसे सीता नवमी भी कहते हैं, माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र पर्व है। माता सीता को धन, समृद्धि और देवी माँ लक्ष्मी का ही अवतार माना जाता है।

 क्या है जानकी नवमी?

 यह पर्व प्रतिवर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व अक्सर राम नवमी (भगवान राम का जन्मोत्सव) के ठीक एक महीने बाद आता है। ‘जानकी’ नाम उनके पिता राजा जनक के नाम पर पड़ा, और उन्हें ‘वैदेही’ (विदेह की पुत्री) तथा ‘सिया’ के नाम से भी जाना जाता है।

 कथा (जन्म)

माता सीता की उत्पत्ति की कथा अत्यंत चमत्कारी और दिव्य है:

प्राचीन काल में, मिथिला राज्य में भयानक सूखा पड़ा। राज्य के राजा जनक ने स्वयं यह संकल्प लिया कि वह प्रजा के कल्याण हेतु अपने हाथों से हल चलाएंगे। जब राजा जनक खेत में हल चला रहे थे, तभी उनके हल का सीरा (हल का अग्रभाग) एक स्थान पर अटक गया। उन्होंने उस स्थान की मिट्टी हटवाई, तो उन्हें वहाँ भूमि के अंदर एक स्वर्ण पेटिका मिली। उस पेटिका को खोलने पर, उसके अंदर एक सुंदर कन्या मिली। राजा जनक ने उन्हें अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया। चूंकि वह कन्या उन्हें हल के सीरा (जो भूमि में रेखा खींचता है) से प्राप्त हुई थीं, इसलिए उनका नाम सीता रखा गया। जनक जी विदेह देश के राजा थे, इसलिए उन्हें वैदेही भी कहा गया।

महत्व और मान्यताएँ

जानकी नवमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, खासकर विवाहित महिलाओं के लिए।

  1. अखंड सौभाग्य की प्राप्ति

  • इस दिन विवाहित महिलाएँ देवी सीता और भगवान राम की एक साथ पूजा करती हैं।
  • मान्यता है कि इस व्रत और पूजा से महिलाओं को अखंड सौभाग्य (पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन) की प्राप्ति होती है।
  1. धन और समृद्धि

  • माता सीता को पृथ्वी की देवी और माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है।
  • उनकी पूजा करने से घर में धन, अन्न और समृद्धि का वास होता है, और सभी कष्ट दूर होते हैं।
  1. राम की शक्ति

  • माता सीता के बिना भगवान राम की कथा अधूरी है। यह पर्व दर्शाता है कि शक्ति (सीता) के बिना पुरुषार्थ (राम) अधूरा है।
  • इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन में धैर्य, त्याग और सहनशीलता जैसे गुण आते हैं, जो माता सीता के प्रमुख गुण थे।
  1. सीता-राम विवाह की वर्षगाँठ

  • हालाँकि, राम नवमी भगवान राम का जन्मोत्सव है, यह मान्यता है कि जानकी नवमी के दिन राम और सीता का विवाह हुआ था, इसलिए यह उनके विवाह की वर्षगाँठ के रूप में भी मनाया जाता है। (यह मान्यता कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है, जबकि मुख्य रूप से यह जन्मोत्सव है)।

पूजा विधि (संक्षेप में)

  • व्रत: भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और फलाहार ग्रहण करते हैं।
  • पूजा: भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा को एक साथ स्थापित किया जाता है।
  • श्रृंगार: माता सीता को विशेष रूप से पीले या लाल रंग की साड़ी, चूड़ियाँ, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है।
  • मंत्र जाप: भक्त श्री राम जय राम जय जय राम या श्री सीतायै नमः मंत्रों का जाप करते हैं।
  • आरती: अंत में, श्री राम-जानकी की आरती की जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है।

सीता नवमी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: सीता नवमी 2026 कब है?

उत्तर: सीता नवमी 2026 में 25 अप्रैल SHANIVAR को मनाई जाएगी। उदयातिथि के अनुसार इसी दिन व्रत और पूजा करना शुभ माना गया है।

प्रश्न 2: सीता नवमी किसकी जयंती है?

उत्तर: यह पर्व माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है।

प्रश्न 3: सीता नवमी का शुभ मुहूर्त क्या है?

उत्तर: मध्याह्न पूजा का शुभ समय सुबह 10:46 बजे से दोपहर 01:23 बजे तक है, जिसकी कुल अवधि लगभग 2 घंटे 36 मिनट है।

प्रश्न 4: सीता नवमी क्यों मनाई जाती है?

उत्तर: यह दिन माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और उनके त्याग, धैर्य और शक्ति का सम्मान करने के लिए विशेष पूजा की जाती है।

प्रश्न 5: माता सीता का जन्म कैसे हुआ था?

उत्तर: पौराणिक कथा के अनुसार, राजा जनक को हल चलाते समय भूमि से एक कन्या प्राप्त हुई, जिन्हें उन्होंने अपनी पुत्री के रूप में अपनाया – वही माता सीता थीं।

प्रश्न 6: सीता नवमी का महत्व क्या है?

उत्तर: इस दिन व्रत और पूजा करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली प्राप्त होती है।

प्रश्न 7: सीता नवमी पर किसकी पूजा की जाती है?

उत्तर: इस दिन भगवान राम और माता सीता की एक साथ पूजा की जाती है।

|| जय जय सीताराम  ||

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