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श्रावण सोमवार व्रत: जानें तिथि, कथा, महत्व और पूजा विधि

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास वर्ष का पांचवां महीना होता है। यह महीना पूरी तरह से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि सावन के सोमवार को व्रत रखने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भोलेनाथ बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

श्रावण सोमवार व्रत 2026 तिथियां

श्रावण सोमवार व्रत 03 अगस्त 2026 से प्रारंभ होकर 24 अगस्त 2026 तक रहेंगे। वहीं, इस दौरान भक्त पूरे श्रद्धा भाव से भगवान शिव का व्रत और पूजन करेंगे।

  • 03 अगस्त 2026 – पहला श्रावण सोमवार व्रत
  • 10 अगस्त 2026 – दूसरा श्रावण सोमवार व्रत
  • 17 अगस्त 2026 – तीसरा श्रावण सोमवार व्रत
  • 24 अगस्त 2026 – चौथा श्रावण सोमवार व्रत

श्रावण सोमवार का महत्व (Significance)

श्रावण सोमवार के महत्व के पीछे कई पौराणिक और आध्यात्मिक कारण हैं:

  1. पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रावण मास में ही समुद्र मंथन हुआ था। इसमें से निकले ‘हलाहल’ विष को पीकर भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा की थी। विष के ताप को कम करने के लिए देवताओं ने उन पर जल की वर्षा की थी। यही कारण है कि सावन में शिवजी का जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है।
  2. माना जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन के महीने में ही कठोर तपस्या की थी। जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें स्वीकार किया। इसलिए यह महीना सुहागिन महिलाओं और अच्छे वर की कामना करने वाली कन्याओं के लिए विशेष है।
  3. शीघ्र फलदायी: कहा जाता है कि सावन के सोमवार का व्रत अन्य दिनों की तुलना में 108 गुना अधिक फलदायी होता है।
  4. ग्रह दोषों की शांति: जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो या कालसर्प दोष जैसी समस्याएं हों, उनके लिए सावन सोमवार का व्रत और रुद्राभिषेक करना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।

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श्रावण सोमवार व्रत में शिव पूजा और शिवलिंग पर जल अर्पित करते भक्त

श्रावण सोमवार व्रत कथा 

इस व्रत से जुड़ी सबसे प्रचलित कथा एक साहूकार की है:

एक समय की बात है, किसी नगर में एक अत्यंत धनी साहूकार रहता था। उसके पास धन-संपत्ति की कोई कमी नहीं थी, लेकिन वह निःसंतान था, जिससे वह हमेशा दुखी रहता था। पुत्र प्राप्ति की इच्छा से वह हर सोमवार को नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा करता था।

उसकी सच्ची भक्ति देखकर एक दिन माता पार्वती ने शिव जी से कहा, “हे नाथ! यह साहूकार आपका परम भक्त है, कृपया इसकी मनोकामना पूरी करें।” शिव जी ने कहा, “हे पार्वती! इसके भाग्य में पुत्र सुख नहीं है। फिर भी तुम्हारे आग्रह पर मैं इसे पुत्र प्राप्ति का वरदान देता हूँ, लेकिन उस पुत्र की आयु केवल 12 वर्ष होगी।”

समय बीता और साहूकार के घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ। साहूकार ने यह बात किसी को नहीं बताई। जब बालक 11 वर्ष का हुआ, तो साहूकार ने उसे उसके मामा के साथ शिक्षा ग्रहण करने के लिए काशी भेज दिया। रास्ते में एक नगर में राजा की पुत्री का विवाह हो रहा था, लेकिन दूल्हा एक आंख से काना था। दूल्हे के पिता ने साहूकार के सुंदर पुत्र को देखा और उसे धोखे से दूल्हे की जगह बिठाकर विवाह संपन्न करा दिया।

विवाह के बाद साहूकार का पुत्र राजकुमारी के दुपट्टे पर यह लिखकर चला गया कि “तुम्हारा विवाह मुझसे हुआ है, लेकिन तुम जिसके साथ जा रही हो वह काना है। मैं शिक्षा के लिए काशी जा रहा हूँ।” राजकुमारी ने यह पढ़ा और ससुराल जाने से मना कर दिया।

इधर साहूकार का पुत्र और उसका मामा काशी पहुँच गए। जिस दिन वह बालक 12 वर्ष का हुआ, उसकी मृत्यु हो गई। मामा जोर-जोर से विलाप करने लगा। उसी समय शिव जी और माता पार्वती वहाँ से गुजर रहे थे। माता पार्वती ने उस बालक को देखा और शिव जी से उसे जीवित करने की प्रार्थना की। महादेव ने अपनी कृपा से उस बालक को पुनः जीवित कर दिया।

शिक्षा पूरी कर वह बालक अपने मामा के साथ लौट रहा था। उसी नगर में पहुँचने पर राजा ने उसे पहचान लिया और अपनी पुत्री को बहुत सारा धन देकर उसके साथ विदा किया। साहूकार अपने पुत्र और पुत्रवधू को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुआ।

 

कथा का सार:

साहूकार ने सावन सोमवार के व्रत के पुण्य से ही अपने मृत पुत्र को पुनः प्राप्त किया था। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस कथा को पढ़ता या सुनता है, उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं और उसकी हर इच्छा पूरी होती है।

 

मान्यताएं और पूजा विधि (Beliefs & Rituals)

सावन सोमवार व्रत की विधि सात्विक और सरल है:

  • प्रातः स्नान: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • अभिषेक: मंदिर जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद और घी (पंचामृत) से अभिषेक करें।
  • प्रिय वस्तुएं: शिवजी को बेलपत्र (सबसे महत्वपूर्ण), धतूरा, भांग, सफेद फूल, अक्षत और चंदन अर्पित करें।
  • मंत्र: पूजा के दौरान ऊं नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।
  • व्रत कथा: पूजा के बाद सोमवार व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें।
  • आहार: दिन में एक बार सात्विक भोजन (फलाहार या बिना नमक का भोजन) ग्रहण करें।

विशेष नोट: सावन के महीने में मंगलवार को ‘मंगला गौरी’ का व्रत भी रखा जाता है, जो विशेष रूप से महिलाओं द्वारा अखंड सौभाग्य के लिए किया जाता है।

 

श्रावण सोमवार व्रत के आवश्यक नियम (क्या करें और क्या न करें)

इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

  • सात्विक आहार: व्रत के दिन फलाहार (फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा) ग्रहण करें। व्रत में सेंधा नमक का ही प्रयोग करें।
  • तामसिक भोजन का त्याग: जो लोग व्रत नहीं भी रखते, उन्हें सावन के सोमवार के दिन मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का पूर्ण रूप से त्याग कर देना चाहिए।
  • ब्रह्मचर्य का पालन: व्रत के दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • क्रोध और निंदा से बचें: मन को शांत रखें। किसी के प्रति ईर्ष्या, क्रोध या अपशब्दों का प्रयोग न करें, क्योंकि शिव जी निर्मल मन वालों पर ही प्रसन्न होते हैं।

निष्कर्ष

श्रावण सोमवार का व्रत केवल शारीरिक तप नहीं है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा (शिव) के साथ जोड़ने का एक परम साधन है। जीवन की हर उलझन, तनाव और बाधा को दूर करने के लिए शिव की शरण से बेहतर और कोई स्थान नहीं है। सच्चे भाव और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, शांति, और ऐश्वर्य का प्रकाश भर देता है।

 

|| हर हर महादेव ||

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