अक्षय तृतीया 2026 कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, स्नान-दान का महत्व और इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्यों की सम्पूर्ण जानकारी।
अक्षय तृतीया कब है?
हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026, रविवार को सुबह 10 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ होगी। यह तिथि 20 अप्रैल 2026, सोमवार को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर समाप्त हो जाएगी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार मध्याह्न व्यापिनी तृतीया के नियम को मानते हुए अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल 2026 को ही मनाया जाएगा।
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, स्नान-दान, जप-तप और शुभ कार्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
इस पावन दिन किए गए पुण्य कर्मों का फल अक्षय (अक्षुण्ण) माना जाता है, अर्थात इसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यह पूरा दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
अक्षय तृतीया: क्या है, कथा, महत्व और मान्यता
अक्षय तृतीया हिंदू धर्म में एक अत्यंत शुभ और पवित्र त्योहार है। इसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है।
क्या है अक्षय तृतीया?
यह पर्व हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
‘अक्षय’ का शाब्दिक अर्थ है “जिसका कभी क्षय (विनाश) न हो” या “जो कभी नष्ट न हो”।
इस दिन किए गए किसी भी धार्मिक कार्य, दान-पुण्य, स्नान, और शुभ कार्य का फल अक्षय हो जाता है, अर्थात वह हमेशा बना रहता है और कभी समाप्त नहीं होता।
अक्षय तृतीया से जुड़ी प्रमुख कथाएँ
अक्षय तृतीया का महत्व कई पौराणिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है:
- युगों का प्रारंभ: माना जाता है कि इस तिथि पर सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था।
- भगवान परशुराम का जन्म: यह तिथि भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इसलिए इसे परशुराम जयंती भी कहते हैं।
- गंगा का अवतरण: मान्यता है कि इसी दिन राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के बाद देवी गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था, जिससे धरती पर जीवन संभव हुआ।
- वेद व्यास जी का लेखन: इसी शुभ दिन पर महर्षि वेद व्यास ने महाभारत लिखना प्रारंभ किया था।
- सुदामा और कृष्ण का मिलन: मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा का मिलन हुआ था, जिसके फलस्वरूप सुदामा को अक्षय धन और समृद्धि की प्राप्ति हुई थी।
- सूर्य देव का पात्र: वनवास के दौरान, इसी दिन भगवान सूर्य ने द्रौपदी को एक अक्षय पात्र प्रदान किया था। इस पात्र में भोजन तब तक समाप्त नहीं होता था जब तक द्रौपदी स्वयं भोजन नहीं कर लेती थीं, जिससे पांडवों को कभी अन्न की कमी नहीं हुई।
महत्व और मान्यताएँ
अक्षय तृतीया को अत्यंत स्वयंसिद्ध (स्वयं सिद्ध) और सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है।
शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ
- पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यह पूरा दिन ही अत्यंत शुभ होता है।
- इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत, तथा सोना-चांदी या संपत्ति की खरीद जैसे सभी मांगलिक कार्य करना बहुत ही फलदायी माना जाता है।
दान और पुण्य का महत्व
- इस दिन किए गए दान और पुण्य का फल कभी समाप्त नहीं होता।
- गर्मी के इस मौसम में जल कलश (पानी का घड़ा), जौ, गेहूं, चावल, सत्तू, छाता, पंखा, घी, चीनी और विशेष रूप से सोना दान करने की परंपरा है।
सोना और संपत्ति खरीदना
- मान्यता है कि इस दिन सोना या अन्य बहुमूल्य वस्तुएँ खरीदना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि घर में धन और समृद्धि का वास अक्षय रूप से बना रहता है।
- लोग इस दिन निवेश या बचत की शुरुआत भी करते हैं।
अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती की पूजा विधि
चूंकि परशुराम जयंती अक्सर अक्षय तृतीया के साथ ही मनाई जाती है, इसलिए पूजा की विधि में दोनों के तत्वों का समावेश होता है।
प्रारंभिक तैयारी (स्नान और संकल्प)
- जल्दी उठना: अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पहले उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं।
- स्नान: किसी पवित्र नदी, तीर्थ स्थान या घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र: स्वच्छ और नए वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल: पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें।
- संकल्प: हाथ में जल, फूल और अक्षत (चावल) लेकर भगवान विष्णु, परशुराम जी और माता लक्ष्मी की पूजा का संकल्प लें।
भगवान परशुराम और विष्णु जी की पूजा
भगवान परशुराम भगवान विष्णु के ही अवतार हैं, अतः उनकी पूजा एक साथ की जाती है:
- प्रतिमा/चित्र स्थापना: भगवान विष्णु या भगवान परशुराम (यदि उपलब्ध हो) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- षोडशोपचार पूजा:
- आवाहन: भगवान का आह्वान करें।
- आसन: आसन अर्पित करें।
- पाद्य, अर्घ्य: चरण धोने के लिए जल अर्पित करें।
- स्नान: पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं।
- वस्त्र और यज्ञोपवीत: वस्त्र और जनेऊ (यज्ञोपवीत) अर्पित करें।
- तिलक: चंदन या रोली का तिलक लगाएं।
- पुष्प: पीले या सफेद रंग के फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
- अक्षत: हल्दी में रंगे हुए अक्षत (साबुत चावल) चढ़ाएं।
- धूप-दीप: धूप और दीप प्रज्वलित करें।
- भोग/नैवेद्य: फल, मिठाई, मिश्री, या मौसमी फल (जैसे खीरा और सत्तू) का भोग लगाएं।
माता लक्ष्मी की विशेष पूजा (अक्षय फल प्राप्ति हेतु)
- भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन और समृद्धि का अक्षय आशीर्वाद मिलता है।
- कुबेर जी की पूजा: कई स्थानों पर इस दिन धन के देवता कुबेर की पूजा भी की जाती है।
- सोने-चांदी की पूजा: यदि इस दिन सोना या अन्य आभूषण खरीदा गया है, तो उसे भगवान के सामने रखकर उसकी पूजा करें।
दान-पुण्य और समापन
पूजा का सबसे महत्वपूर्ण भाग दान है, क्योंकि इस दिन किए गए दान का फल कभी नष्ट नहीं होता:
- जल कलश दान: गर्मियों का मौसम होने के कारण, किसी ब्राह्मण या गरीब व्यक्ति को जल से भरा कलश (घड़ा), पंखा और छाता दान करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
- अन्न दान: जौ, गेहूं, चावल, सत्तू, या दालों का दान करें।
- श्रद्धा अनुसार दान: अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, दक्षिणा, या गाय दान करें।
- आरती: अंत में, भगवान विष्णु, परशुराम जी और माता लक्ष्मी की आरती करें।
- प्रसाद वितरण: प्रसाद सभी परिवारजनों और मित्रों में वितरित करें।
अक्षय तृतीया 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: अक्षय तृतीया 2026 में कब है?
उत्तर: वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:50 बजे से शुरू होकर 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे तक रहेगी।
प्रश्न 2: अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है?
उत्तर: अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ तिथि माना जाता है। इस दिन किए गए दान-पुण्य, जप-तप, स्नान और शुभ कार्यों का फल अक्षय अर्थात कभी समाप्त न होने वाला माना जाता है।
प्रश्न 3: अक्षय तृतीया का क्या अर्थ है?
उत्तर: ‘अक्षय’ का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो और ‘तृतीया’ का अर्थ है शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि। इसलिए इस दिन किए गए पुण्य कर्मों का फल कभी नष्ट नहीं होता।
प्रश्न 4: अक्षय तृतीया के दिन किस भगवान की पूजा की जाती है?
उत्तर: इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर भगवान परशुराम की भी पूजा की जाती है, क्योंकि इसी तिथि को उनका जन्म हुआ था।
प्रश्न 5: अक्षय तृतीया के दिन क्या करना शुभ माना जाता है?
उत्तर: इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना, सोना-चांदी खरीदना, निवेश शुरू करना और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्रश्न 6: क्या अक्षय तृतीया के दिन मुहूर्त देखने की आवश्यकता होती है?
उत्तर: नहीं, अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है। इसलिए इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती।
प्रश्न 7: अक्षय तृतीया के दिन क्या दान करना चाहिए?
उत्तर: इस दिन जल से भरा घड़ा, जौ, गेहूं, चावल, सत्तू, छाता, पंखा, वस्त्र, घी, चीनी और सोना दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
प्रश्न 8: क्या अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती एक ही दिन होती हैं?
उत्तर: हाँ, अक्सर अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम की जयंती भी मनाई जाती है, क्योंकि उनका जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था।
।। हरि शरणम् ।।
श्रीहरि की कृपा और आशीर्वाद आप सबके जीवन में सदा बना रहे।
