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भाद्रपद भौम प्रदोष व्रत: कर्ज मुक्ति, मंगल दोष निवारण और शिव कृपा का महा-संयोग

भौम कृष्ण प्रदोष व्रत मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 को रखा जाएगा।

जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तब उसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। 

प्रदोष पूजा मुहूर्त

  • प्रदोष पूजा मुहूर्त: सायं 06:35 बजे से रात्रि 08:52 बजे तक
  • मुहूर्त की अवधि: 2 घंटे 18 मिनट

प्रदोष काल

  • दिन का प्रदोष समय: सायं 06:35 बजे से रात्रि 08:52 बजे तक

त्रयोदशी तिथि

  • त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 8 सितम्बर 2026 को दोपहर 02:42 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 9 सितम्बर 2026 को दोपहर 12:30 बजे

सनातन धर्म में भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ‘प्रदोष व्रत’ को सबसे उत्तम और शीघ्र फलदायी माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के दोनों पक्षों (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष) की त्रयोदशी तिथि (13वें दिन) को प्रदोष व्रत किया जाता है।

जब यह अत्यंत पावन त्रयोदशी तिथि मंगलवार (Tuesday) के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत’ (Bhaum Pradosh Vrat) कहा जाता है। और जब यह अद्भुत संयोग भगवान की भक्ति और प्रायश्चित के महीने भाद्रपद’ (भादो) में बनता है, तो इसका आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व कई हजार गुना बढ़ जाता है। भाद्रपद भौम प्रदोष व्रत मुख्य रूप से जीवन के भारी कर्ज, गंभीर रोगों और मंगल दोष से मुक्ति पाने का एक अचूक अनुष्ठान है।

आइए, इस कल्याणकारी व्रत के अर्थ, इसके गहरे महत्व, पौराणिक कथा और पूजा विधि को विस्तार से समझते हैं।

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भाद्रपद भौम प्रदोष व्रत क्या है? (नाम का अर्थ)

इस व्रत का नाम तीन प्रमुख शब्दों के मेल से बना है:

  • भाद्रपद (Bhadrapada): हिंदू पंचांग का छठा महीना, जो पूर्ण रूप से भक्ति, तपस्या और आत्म-शुद्धि को समर्पित है।
  • भौम (Bhaum): मंगलवार का दिन। ज्योतिष में मंगलवार के स्वामी ‘मंगल देव’ हैं, जिन्हें ‘भूमिपुत्र’ (भौम) कहा जाता है।
  • प्रदोष (Pradosh): शाम का वह शुभ समय (सूर्यास्त के आसपास), जब भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं।

चूँकि यह व्रत भाद्रपद के महीने में मंगलवार के दिन आता है, इसलिए इसे ‘भाद्रपद भौम प्रदोष व्रत’ कहा जाता है। शास्त्रों में भौम प्रदोष के दिन शिव जी के ऋणमुक्तेश्वर’ (कर्ज से मुक्ति दिलाने वाले) स्वरूप की आराधना की जाती है।

 

भाद्रपद भौम प्रदोष व्रत का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

भाद्रपद का महीना चातुर्मास के अंतर्गत आता है, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं और सृष्टि का पूरा संचालन भगवान शिव के हाथों में होता है। इस समय भौम प्रदोष का आना अत्यंत फलदायी है:

  • कर्ज (Debts) से शीघ्र मुक्ति: यदि कोई व्यक्ति कर्ज के भारी बोझ तले दबा है और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है, तो भाद्रपद भौम प्रदोष का व्रत और प्रदोष काल में शिव पूजा उसे धन प्राप्ति के नए मार्ग दिखाती है।
  • मंगल दोष (Mangal Dosh) की शांति: जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष है, जिसके कारण विवाह में विलंब हो रहा है या दांपत्य जीवन में कलह है, उनके लिए यह व्रत मंगल ग्रह की उग्रता को शांत कर सुख-शांति लाता है।
  • शत्रुओं और रोगों का नाश: मंगल देव साहस और रक्त के कारक हैं। इस दिन भगवान शिव और हनुमान जी की संयुक्त पूजा करने से गंभीर शारीरिक कष्टों, रक्त संबंधी बीमारियों और शत्रुओं के भय से मुक्ति मिलती है।

भौम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा (निर्दोष की रक्षा और ऋण मुक्ति)

भौम प्रदोष व्रत से जुड़ी यह प्रामाणिक कथा बताती है कि शिव कृपा से जीवन के सबसे बड़े संकट भी कैसे पल भर में दूर हो जाते हैं:

प्राचीन काल में एक नगर में एक अत्यंत गरीब और वृद्ध ब्राह्मणी रहती थी। वह भगवान शिव और हनुमान जी की परम भक्त थी। वह भिक्षा मांगकर अपना और अपने इकलौते पुत्र का भरण-पोषण करती थी। ब्राह्मणी नियम से हर मंगलवार को व्रत रखती थी और प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करती थी।

एक दिन उसका पुत्र रास्ते से कहीं जा रहा था, तभी राजा के सैनिकों ने उसे चोर समझकर पकड़ लिया। बिना पूरी जांच-पड़ताल किए राजा ने उस निर्दोष ब्राह्मण कुमार को कारागार (जेल) में डाल दिया।

पुत्र के बंदी बन जाने से वृद्ध ब्राह्मणी पूरी तरह बेसहारा हो गई। उस पर कर्ज का भारी बोझ भी था। अगले दिन मंगलवार था और त्रयोदशी तिथि (भौम प्रदोष) का पावन दिन था। ब्राह्मणी ने आंसुओं से भरी आंखों के साथ पूर्ण श्रद्धा से भौम प्रदोष का व्रत किया। शाम को प्रदोष काल में उसने शिव मंदिर जाकर प्रार्थना की, हे भोलेनाथ! हे संकटमोचन! मेरा पुत्र निर्दोष है। मुझे इस भारी विपत्ति और कर्ज के दलदल से बाहर निकालें।”

ब्राह्मणी की सच्ची पुकार सुनकर उसी रात भगवान शिव ने राजा को स्वप्न में दर्शन दिए और अत्यंत क्रोधित होकर कहा- जिस ब्राह्मण कुमार को तुमने बंदी बनाया है, वह पूर्णतः निर्दोष है। यदि तुमने कल सुबह ही उसे रिहा नहीं किया, तो तुम्हारे पूरे कुल और राज्य का विनाश हो जाएगा।”

राजा भयंकर भय के साथ नींद से जागा। सुबह होते ही उसने उस ब्राह्मण पुत्र को ससम्मान कारागार से मुक्त किया। अपनी बहुत बड़ी भूल सुधारने के लिए राजा ने उस पुत्र को बहुत सा धन, आभूषण और रहने के लिए एक सुंदर भवन दान में दिया।

जब पुत्र धन लेकर घर लौटा, तो ब्राह्मणी ने भगवान शिव के चरणों में गिरकर धन्यवाद किया। भौम प्रदोष व्रत के प्रताप से न केवल उसका पुत्र सुरक्षित वापस आ गया, बल्कि उसके जीवन भर का कर्ज और दरिद्रता भी हमेशा के लिए समाप्त हो गई।

 

भाद्रपद भौम प्रदोष व्रत की पूजा विधि

इस विशेष दिन भगवान शिव के साथ-साथ मंगल देव और हनुमान जी की पूजा का भी विधान है। पूजा विधि इस प्रकार है:

  1. प्रातःकाल स्नान और संकल्प: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि कर लें। इस दिन लाल या हल्के गुलाबी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करना शुभ होता है। मन में दिन भर के सात्विक व्रत (फलाहार या निर्जला) का संकल्प लें।
  2. दिन की सामान्य पूजा: सुबह के समय शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें और हनुमान जी को लाल सिंदूर या चमेली के तेल का चोला चढ़ाएं।
  3. प्रदोष काल की मुख्य पूजा: व्रत की सबसे महत्वपूर्ण पूजा शाम के समय (सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद के बीच) की जाती है। इस समय पुनः स्नान करें या हाथ-मुंह धोकर स्वच्छ हो जाएं।
  4. शिवलिंग का महा-अभिषेक: शिवलिंग का कच्चे दूध, गंगाजल और विशेष रूप से शहद (Honey) से अभिषेक करें। भौम प्रदोष पर शहद से अभिषेक करना कर्ज मुक्ति का सबसे अचूक उपाय माना गया है।
  5. लाल पुष्प और बेलपत्र: भगवान शिव को लाल चंदन का तिलक लगाएं। उन्हें लाल फूल (गुलाब या गुड़हल), साबुत अक्षत, भांग, धतूरा और बेलपत्र अवश्य अर्पित करें।
  6. हनुमान चालीसा और मंत्र जाप: रुद्राक्ष की माला से भगवान शिव के ॐ नमः शिवाय’ या ॐ ऋणमुक्तेश्वराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद एक बार ‘हनुमान चालीसा’ या ‘बजरंग बाण’ का पाठ अवश्य करें।
  7. व्रत का पारण: शिव जी की आरती उतारने के बाद आप फलाहार कर सकते हैं या एक समय का सात्विक और मीठा भोजन ग्रहण कर अपना व्रत खोल सकते हैं।

मुख्य मान्यताएं और व्रत के नियम

  • नमक का त्याग: भौम प्रदोष के व्रत में नमक का सेवन पूर्णतः वर्जित माना जाता है। भोजन में मीठी चीजें (जैसे हलवा, खीर या चूरमा) ही ग्रहण करनी चाहिए।
  • लाल वस्तुओं का दान: इस दिन किसी गरीब या जरूरतमंद को लाल मसूर की दाल, गुड़, लाल कपड़े या तांबे के बर्तन का दान करना कुंडली से मंगल दोष को शांत करता है।
  • क्रोध और विवाद से बचें: मंगलवार का दिन मंगल (अग्नि) का दिन है, इसलिए इस दिन भूलकर भी क्रोध न करें, अपशब्द न बोलें और किसी से विवाद न करें। अपना पूरा ध्यान शिव की भक्ति में लगाए रखें।

निष्कर्ष

भाद्रपद भौम प्रदोष व्रत केवल एक उपवास का दिन नहीं है, बल्कि यह ईश्वर की न्याय व्यवस्था पर अटूट विश्वास का प्रतीक है। आज के युग में जहाँ हर दूसरा व्यक्ति आर्थिक तनाव या कर्ज के बोझ से परेशान है, वहाँ भौम प्रदोष का यह व्रत एक संजीवनी की तरह काम करता है। सच्चे हृदय से की गई भगवान शिव की आराधना बड़े से बड़े संकटों और पहाड़ों जैसे कर्ज को भी देखते ही देखते रेत की तरह ढहा देती है, और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का नया सवेरा लाती है।

|| हर हर महादेव ||

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