जानें हिंदू कैलेंडर के महीनों के नाम कैसे पड़े, उनका नक्षत्रों से क्या संबंध है, उनका इतिहास और धार्मिक महत्व क्या है।
हिंदू महीनों के नाम कैसे पड़े? (इतिहास, नक्षत्र और महत्व)
हिंदू पंचांग (Calendar) एक बहुत ही प्राचीन और वैज्ञानिक प्रणाली है, जो चंद्रमा की गति पर आधारित है। इसमें कुल 12 मास होते हैं।
हर महीने का नाम उस नक्षत्र (Star Constellation) के आधार पर रखा गया है जिसमें उस महीने की पूर्णिमा आती है।
नक्षत्र क्या है?:
नक्षत्र का अर्थ है आकाश में स्थित सितारों का एक विशेष समूह। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करते समय लगभग हर दिन आकाश में एक नए स्थान पर दिखाई देता है और लगभग 27 दिनों में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है। इसी आधार पर आकाश को 27 भागों में विभाजित किया गया है, जिन्हें 27 नक्षत्र कहा जाता है।
नक्षत्रों की पौराणिक कथा:
पुराणों के अनुसार इन 27 नक्षत्रों को दक्ष प्रजापति की 27 पुत्रियाँ माना गया है, जिनका विवाह सोमदेव अर्थात चंद्रमा से हुआ था। कहा जाता है कि चंद्रमा को अपनी सभी पत्नियों में रोहिणी सबसे अधिक प्रिय थीं। इस कारण वे अधिकतर समय रोहिणी नक्षत्र के साथ ही रहते थे, जिससे अन्य पत्नियाँ अप्रसन्न हो गईं। उनकी शिकायत पर दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को क्षय होने का श्राप दे दिया। बाद में भगवान शिव की कृपा से चंद्रमा को इस श्राप से आंशिक मुक्ति मिली, जिसके कारण चंद्रमा का घटता और बढ़ता रूप दिखाई देता है।
वैदिक काल से ही नक्षत्रों का धार्मिक, ज्योतिषीय और सांस्कृतिक महत्व रहा है, और इन्हीं के आधार पर हिंदू पंचांग के महीनों का निर्धारण किया जाता है।
चैत्र मास – चित्रा नक्षत्र से
चैत्र महीने का नाम चित्रा नक्षत्र पर आधारित है।
इस मास की पूर्णिमा चित्रा नक्षत्र में पड़ती है।
चित्रा का अर्थ है – चमकदार, सुंदर।
यह महीना प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक है और हिंदू पंचांग का पहला महीना माना जाता है।
वैशाख मास – विशाखा नक्षत्र से
वैशाख मास की पूर्णिमा विशाखा नक्षत्र में आती है। इससे इसका नाम पड़ा वैशाख।
विशाखा का अर्थ है – शाखाओं में बटा हुआ तारा, समूह।
यह महीना पुण्य और दान का प्रतीक माना जाता है।
ज्येष्ठ मास – ज्येष्ठा नक्षत्र से
इस मास की पूर्णिमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होती है। इसलिए इसका नाम पड़ा ज्येष्ठ।
ज्येष्ठा का अर्थ है – ‘सबसे बड़ा’।
यह वर्ष का सबसे गर्म महीना होता है, सूर्य की उष्णता चरम पर रहती है।
आषाढ़ मास – आषाढ़ा नक्षत्र से
आषाढ़ महीने में पूर्णिमा
पूर्वाषाढ़ा या उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में आती है। इसी के आधार पर इसका नाम पड़ा आषाढ़।
आषाढ़ा का अर्थ है – दृढ़, स्थिर।
यह महीने मानसून की शुरुआत का संकेत देता है।
श्रावण मास – श्रवण नक्षत्र से
श्रावण मास की पूर्णिमा श्रवण नक्षत्र में होती है। इसी कारण इसे श्रावण कहा गया।
श्रवण का अर्थ है – ‘सुनना’।
यह महीना भगवान शिव का अत्यंत प्रिय माना गया है।
भाद्रपद मास – भाद्रपदा नक्षत्र से
इस मास की पूर्णिमा
पूर्व भाद्रपदा या उत्तर भाद्रपदा नक्षत्र में पड़ती है। इससे इसका नाम भाद्रपद पड़ा।
भद्र का अर्थ है – शुभ, मंगलकारी।
इस महीने में गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी जैसे पर्व आते हैं।
आश्विन मास – अश्विनी नक्षत्र से
आश्विन महीने का नाम अश्विनी नक्षत्र पर आधारित है। पूर्णिमा इसी नक्षत्र में पड़ती है।
अश्विनी का अर्थ है – घोड़े जैसी आकृति वाला तारा समूह।
यह महीना स्वास्थ्य और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
कार्तिक मास – कृत्तिका नक्षत्र से
कार्तिक मास की पूर्णिमा कृत्तिका (या कार्तिका) नक्षत्र में आती है। इससे इसका नाम पड़ा कार्तिक।
कृत्तिका अग्नि का नक्षत्र माना जाता है।
यह महीने दीपावली का, प्रकाश का और पवित्रता का प्रतीक है।
मार्गशीर्ष मास – मृगशिरा नक्षत्र से
इस महीने की पूर्णिमा मृगशिरा नक्षत्र में होती है। इससे इसका नाम पड़ा मार्गशीर्ष (अगहन भी कहा जाता है)।
मृगशिरा का अर्थ है – हिरण का सिर।
यह महीना विशेष रूप से श्रीकृष्ण की उपासना का माना जाता है।
पौष मास – पुष्य नक्षत्र से
पौष मास का नाम पुष्य नक्षत्र पर आधारित है। पूर्णिमा इसी नक्षत्र में आती है।
पुष्य का अर्थ है – पोषण करने वाला।
यह महीने दान और सूर्य उपासना का समय है।
माघ मास – मघा नक्षत्र से
माघ महीने की पूर्णिमा मघा नक्षत्र में होती है। इससे नाम पड़ा माघ।
मघा का अर्थ है – शक्ति और तेजस्विता।
माघ महीने में स्नान और दान बहुत शुभ माने गए है।
फाल्गुन मास – फाल्गुनी नक्षत्र से
इस मास की पूर्णिमा पूर्वा फाल्गुनी या उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में आने से इसका नाम पड़ा फाल्गुन।
फाल्गुनी का अर्थ है – सुंदर और सौम्य।
यह महीना उल्लास और रंगों का प्रतीक है, क्योंकि इसी में होली आती है।
अध्याय का सार (Summary)
हिंदू पंचांग के सभी 12 महीनों के नाम उस नक्षत्र पर रखे गए हैं जिसमें उस मास की पूर्णिमा पड़ती है। यह एक वैज्ञानिक और खगोलीय सिद्धांत है जो हजारों वर्षों से चला आ रहा है।
।। राधे-राधे ।।

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Dhanyabad