Spread the love

श्री महेश नवमी: जानें तिथि, पूजा विधि, कथा और महत्व

यह पर्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इसे ‘माहेश्वरी वंशोत्पत्ति दिवस’ भी कहा जाता है। यह वह दिन है जब माहेश्वरी समाज की स्थापना हुई थी और भगवान शिव ने उन्हें अपना नाम ‘महेश’ प्रदान किया था।

 श्री महेश नवमी का पर्व मंगलवार, 23 जून 2026 को मनाया जाएगा।

 नवमी तिथि प्रारम्भ: 22 जून 2026 को दोपहर 03:39 बजे

नवमी तिथि समाप्त: 23 जून 2026 को शाम 04:39 बजे

भगवान शिव जी की आरती और चालीसा पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें 

महेश नवमी 2026 पर भगवान शिव और माहेश्वरी समाज की पूजा

पौराणिक कथा (Katha)

महेश नवमी के पीछे की कथा क्षत्रिय वंश से वैश्य (व्यापारी) बनने के परिवर्तन की कहानी है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार राजा खड़गलसेन के पुत्र सुजानसेन और उनके 72 उमराव (सैनिक/साथी) शिकार के लिए जंगल में गए थे। अनजाने में उन्होंने वहां तपस्या कर रहे ऋषियों के यज्ञ में विघ्न डाल दिया। क्रोधित होकर ऋषियों ने उन्हें पत्थर (पाषाण) बन जाने का श्राप दे दिया।

अपने पतियों को पत्थर बना देख उनकी पत्नियां अत्यंत दुखी हुईं। उन्होंने ऋषियों से क्षमा मांगी, तो ऋषियों ने उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने को कहा।

उन स्त्रियों की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर, ज्येष्ठ शुक्ल नवमी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती प्रकट हुए। भगवान शिव ने उन 72 सैनिकों को पुनः जीवनदान दिया और श्राप से मुक्त किया। भगवान शिव ने उन्हें आदेश दिया कि वे अब हिंसा (क्षत्रिय धर्म) छोड़कर अहिंसा और व्यापार (वैश्य धर्म) को अपनाएं। भगवान शिव ने कहा, आज से तुम मेरे नाम महेशसे जाने जाओगे और तुम्हारी पहचान माहेश्वरीहोगी।”

यही 72 उमराव आगे चलकर माहेश्वरी समाज के 72 गोत्रों (जैसे बिड़ला, बाहेती, बजाज आदि) के पूर्वज बने।

 

महत्व (Significance)

महेश नवमी का महत्व केवल एक त्योहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा का प्रतीक है:

  • अहिंसा का संदेश: यह दिन हिंसा पर अहिंसा की विजय का प्रतीक है। इसने एक योद्धा समुदाय को शांतिप्रिय व्यापारी समुदाय में बदल दिया।
  • समाज की एकता: यह दिन माहेश्वरी समाज की एकता और अखंडता को दर्शाता है। इसे ‘माहेश्वरी स्थापना दिवस’ के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।
  • शिव-शक्ति की कृपा: यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है, क्योंकि उन्हीं के आशीर्वाद से इस वंश की रक्षा और उत्पत्ति हुई।

मान्यता और परंपराएं (Manyata & Rituals)

इस दिन भक्त विशेष रूप से शिव परिवार की पूजा करते हैं। प्रमुख मान्यताएं इस प्रकार हैं:

  • पूजा-अभिषेक: इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक और विशेष पूजन किया जाता है। साथ ही माता पार्वती का श्रृंगार और पूजन होता है।
  • शोभायात्रा: माहेश्वरी समाज के लोग इस दिन भगवान महेश की भव्य शोभायात्रा निकालते हैं।
  • वंशावली का स्मरण: इस दिन समाज के लोग अपने पूर्वजों और अपने गोत्र (कुल) की उत्पत्ति को याद करते हैं।
  • दान और सेवा: महेश नवमी पर प्याऊ लगाने, गरीबों को भोजन कराने और रक्तदान जैसे सामाजिक कार्य करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • जयकारा: इस दिन विशेष रूप से जय महेश” के जयकारे लगाए जाते हैं।

संक्षेप में, महेश नवमी भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और माहेश्वरी समाज के गौरवशाली इतिहास का उत्सव है।

|| भगवान शिव की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे ||

|| हर हर महादेव ||

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top