श्री कृष्ण छठी पूजन: बाल गोपाल की रक्षा और वात्सल्य प्रेम का पावन उत्सव
भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में जब भी किसी घर में बच्चे का जन्म होता है, तो जन्म के ठीक छठे दिन एक विशेष संस्कार किया जाता है, जिसे ‘छठी पूजन’ कहते हैं। यह पूजा नवजात शिशु को बुरी नजर से बचाने, उसकी लंबी आयु और देवी षष्ठी (छठी माता) का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है।
जब हम भगवान श्रीकृष्ण को अपने घर में एक बालक (लड्डू गोपाल) के रूप में पूजते हैं, तो उनकी लीलाओं और जीवन को भी बिल्कुल एक आम शिशु की तरह ही माना जाता है। इसीलिए, श्री कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक छह दिन बाद (भाद्रपद मास में) भगवान श्रीकृष्ण का ‘छठी पूजन’ अत्यंत धूमधाम और वात्सल्य भाव के साथ मनाया जाता है। आइए, इस अनूठे पर्व के महत्व, पूतना वध से जुड़ी कथा और पूजा की मान्यताओं को विस्तार से समझते हैं।
श्री कृष्ण छठी पूजन क्या है?
यह पर्व भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप के प्रति प्रेम और देखभाल का प्रतीक है।
भक्त यशोदा मैया बनकर कान्हा को नहलाते हैं, नए कपड़े पहनाते हैं और उनका नामकरण करते हैं। यह पूजा संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और बुरी नजर से रक्षा के लिए की जाती है।
श्री कृष्ण छठी की पौराणिक कथा (पूतना वध का प्रसंग)
श्री कृष्ण की छठी मनाने के पीछे द्वापर युग की एक अत्यंत रोचक और चमत्कारिक कथा जुड़ी हुई है:
कथा के अनुसार, जब मथुरा के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ और वासुदेव जी उन्हें रातों-रात गोकुल में नंदबाबा के घर छोड़ आए, तब यह खबर कंस तक पहुँच गई। कंस को जब पता चला कि उसे मारने वाला बालक गोकुल में पल रहा है, तो उसने शिशु कृष्ण को मारने के लिए ‘पूतना’ नाम की एक भयंकर और मायावी राक्षसी को भेजा।
जन्माष्टमी के ठीक छठे दिन, पूतना एक अत्यंत सुंदर गोपी का रूप धारण करके नंद भवन में पहुँच गई। उसने अपने स्तनों पर हलाहल विष (अत्यंत घातक जहर) लगाया हुआ था। यशोदा मैया उस सुंदर स्त्री के छल को समझ नहीं पाईं और उन्होंने उसे अपने लाल को खिलाने की अनुमति दे दी।
पूतना ने बाल कृष्ण को गोद में उठाया और विष पिलाने के इरादे से अपना दूध पिलाने लगी। लेकिन भगवान तो सर्वज्ञ हैं। कृष्ण जी ने दूध पीने के साथ-साथ पूतना के प्राण भी खींच लिए। कुछ ही पलों में पूतना अपने असली भयंकर राक्षसी रूप में आ गई और चीखते हुए धरती पर गिरकर मर गई।
इतनी बड़ी राक्षसी को मरा हुआ देखकर नंदबाबा, माता यशोदा और पूरा गोकुल घबरा गया। यशोदा मैया डर गईं कि उनके लाल को किसी की बुरी नजर लग गई है और राक्षसों का साया मंडरा रहा है।
तब गोकुल के विद्वान ब्राह्मणों और गर्ग मुनि ने माता यशोदा को सलाह दी कि बालक की रक्षा के लिए जन्म के छठे दिन ‘षष्ठी देवी’ (छठी माता) का पूजन किया जाए। तब माता यशोदा ने कान्हा को पंचगव्य से स्नान कराया, उनकी नजर उतारी और छठी माता की पूजा की, ताकि उनका कान्हा हमेशा सुरक्षित रहे। उसी दिन से श्री कृष्ण छठी मनाने की यह पावन परंपरा शुरू हुई।
श्री कृष्ण छठी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
भगवान तो स्वयं ब्रह्मांड के रक्षक हैं, फिर उनकी छठी क्यों मनाई जाती है? इसका उत्तर भगवान और भक्त के बीच के प्रेम में छिपा है:
- संतान सुरक्षा: माना जाता है कि जो माताएं यह व्रत या पूजा करती हैं, उनकी संतानों की रक्षा स्वयं भगवान कृष्ण और छठी मैया करती हैं।
- नामकरण संस्कार: कई घरों में इसी दिन लड्डू गोपाल का औपचारिक रूप से नाम (जैसे- माखनचोर, लड्डू, ठाकुर जी) रखा जाता है।
- शुद्धिकरण: जन्म के बाद के ‘सूत’ (अशुद्धि) को समाप्त करने के लिए भी छठी पूजी जाती है, जिससे घर में शुद्धता आती है।
पूजा विधि और मान्यताएं (Rituals)
छठी पूजन का तरीका बिल्कुल एक छोटे बच्चे की छठी जैसा होता है:
- पंचामृत स्नान: सुबह लड्डू गोपाल को शंख में दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल भरकर स्नान कराया जाता है।
- नए वस्त्र: स्नान के बाद उन्हें पीले रंग के नए छोटे-छोटे कपड़े पहनाए जाते हैं।
- कढ़ी-चावल का भोग: इस दिन का विशेष भोग ‘कढ़ी-चावल‘ होता है। इसके अलावा माखन-मिश्री और खीर भी चढ़ाई जाती है।
- काजल लगाना: जैसे बच्चे को नजर से बचाने के लिए काजल लगाया जाता है, वैसे ही लड्डू गोपाल को भी काजल का टीका लगाया जाता है।
- नामकरण: भक्त अपने लड्डू गोपाल का एक प्यारा सा नाम रखते हैं और उन्हें उसी नाम से पुकारने का संकल्प लेते हैं।
निष्कर्ष
श्री कृष्ण छठी पूजन भक्ति के उस स्वरूप का दर्शन है, जहाँ भगवान कोई दूर बैठा परमेश्वर नहीं, बल्कि हमारे घर का एक छोटा सा सदस्य बन जाता है। माता यशोदा के उसी वात्सल्य प्रेम को जीवित रखते हुए, जब भक्त अपने हाथों से कान्हा का श्रृंगार कर उन्हें कढ़ी-चावल का भोग लगाते हैं, तो घर का पूरा वातावरण एक दिव्य आनंद से भर जाता है। यह पर्व हमारे घर-परिवार और बच्चों के जीवन में सुरक्षा, स्वास्थ्य और खुशियों का आशीर्वाद लेकर आता है।
|| जय श्री कृष्ण ||
