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स्कन्द षष्ठी 2026: जनवरी से दिसम्बर तक पूरी सूची
जानें कथा, पूजा विधि, महत्व और स्कन्द षष्ठी व्रत से दूर होती हैं सभी बाधाएं

स्कन्द षष्ठी व्रत जनवरी

 शनिवार, 24 जनवरी 2026 (माघ, शुक्ल षष्ठी) ।

तिथि प्रारम्भ: 24 जनवरी 2026, रात्रि 01:46 बजे । तिथि समाप्त: 25 जनवरी 2026, रात्रि 12:39 बजे ।


स्कन्द षष्ठी व्रत फ़रवरी  

रविवार, 22 फरवरी 2026 (फाल्गुन, शुक्ल षष्ठी) ।

तिथि प्रारम्भ: 22 फरवरी 2026, प्रातः 11:09 बजे । तिथि समाप्त: 23 फरवरी 2026, प्रातः 09:09 बजे ।


स्कन्द षष्ठी व्रत मार्च  

मंगलवार, 24 मार्च 2026 (चैत्र, शुक्ल षष्ठी) ।

तिथि प्रारम्भ: 23 मार्च 2026, सायं 06:38 बजे । तिथि समाप्त: 24 मार्च 2026, सायं 04:07 बजे ।


स्कन्द षष्ठी व्रत अप्रैल 

बुधवार, 22 अप्रैल 2026 (वैशाख, शुक्ल षष्ठी) ।

तिथि प्रारम्भ: 22 अप्रैल 2026, रात्रि 01:19 बजे । तिथि समाप्त: 22 अप्रैल 2026, रात्रि 10:49 बजे ।

अधिक स्कन्द षष्ठी व्रत मई  

बृहस्पतिवार, 21 मई 2026 (ज्येष्ठ, शुक्ल षष्ठी) ।

तिथि प्रारम्भ: 21 मई 2026, प्रातः 08:26 बजे । तिथि समाप्त: 22 मई 2026, प्रातः 06:24 बजे ।


स्कन्द षष्ठी व्रत जून 

शुक्रवार, 19 जून 2026 (ज्येष्ठ, शुक्ल षष्ठी) ।

तिथि प्रारम्भ: 19 जून 2026, सायं 04:59 बजे । तिथि समाप्त: 20 जून 2026, दोपहर 03:46 बजे ।


स्कन्द षष्ठी व्रत जुलाई 

रविवार, 19 जुलाई 2026 (आषाढ़, शुक्ल षष्ठी) ।

तिथि प्रारम्भ: 19 जुलाई 2026, प्रातः 03:42 बजे । तिथि समाप्त: 20 जुलाई 2026, प्रातः 03:29 बजे ।

स्कन्द षष्ठी व्रत अगस्त

सोमवार, 17 अगस्त 2026 (श्रावण, शुक्ल षष्ठी) ।

तिथि प्रारम्भ: 17 अगस्त 2026, सायं 05:00 बजे । तिथि समाप्त: 18 अगस्त 2026, सायं 05:50 बजे ।


स्कन्द षष्ठी व्रत सितम्बर 

बुधवार, 16 सितम्बर 2026 (भाद्रपद, शुक्ल षष्ठी) ।

तिथि प्रारम्भ: 16 सितम्बर 2026, प्रातः 08:59 बजे । तिथि समाप्त: 17 सितम्बर 2026, प्रातः 10:47 बजे ।


स्कन्द षष्ठी व्रत अक्टूबर  

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 (आश्विन, शुक्ल षष्ठी) 

तिथि प्रारम्भ: 16 अक्टूबर 2026, प्रातः 03:25 बजे

तिथि समाप्त: 17 अक्टूबर 2026, प्रातः 05:54 बजे ।


सूर सम्हारम / स्कन्द षष्ठी व्रत नवम्बर 

रविवार, 15 नवम्बर 2026 (कार्तिक, शुक्ल षष्ठी) ।

तिथि प्रारम्भ: 14 नवम्बर 2026, रात्रि 11:23 बजे तिथि समाप्त: 16 नवम्बर 2026, रात्रि 02:00 बजे 


सुब्रह्मण्य षष्ठी / स्कन्द षष्ठी व्रत दिसम्बर  

मंगलवार, 15 दिसम्बर 26 (मार्गशीर्ष, शुक्ल षष्ठी) ।

तिथि प्रारम्भ: 14 दिसम्बर 2026, सायं 07:15 बजे । तिथि समाप्त: 15 दिसम्बर 2026, रात्रि 09:19 बजे ।

Lord Murugan blessing devotees

स्कंद षष्ठी: कथा, महत्व और पूजन विधि

स्कन्द षष्ठी भगवान कार्तिकेय (स्कन्द, मुरुगन, कुमार) को समर्पित तिथि है। हर माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कन्द षष्ठी मनाई जाती है, लेकिन चैत्र मास की स्कन्द षष्ठी विशेष रूप से अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जाती है।

स्कन्द षष्ठी क्या है?

यह तिथि भगवान शिव के पुत्र भगवान स्कन्द को समर्पित है, जो देवताओं के सेनापति माने जाते हैं।इन्हें शक्ति, पराक्रम, साहस और रक्षा के देवता के रूप में पूजा जाता है।

स्कंद षष्ठी की कथा (Skanda Sashti Katha)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय के जन्म और उनकी विजय से जुड़ी है:

जब तारकासुर नामक दैत्य ने अपने बल से तीनों लोकों में आतंक फैला दिया था, तब देवताओं को पराजय का सामना करना पड़ा। ब्रह्मा जी के वरदान के अनुसार, तारकासुर का वध केवल शिव और पार्वती के पुत्र द्वारा ही हो सकता था। देवताओं की प्रार्थना पर, भगवान शिव के तेज से बालक कार्तिकेय (स्कंद) का जन्म हुआ। पुराणों के अनुसार, छह कृतिकाओं ने उनकी रक्षा और स्तनपान कराया था, इसलिए उन्हें कार्तिकेय कहा जाता है। षष्ठी तिथि के दिन ही भगवान कार्तिकेय ने दैत्य तारकासुर का वध किया और देवताओं को उनका स्थान वापस दिलाया। यह दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

महत्व और मान्यताएं (Importance and Beliefs)

स्कंद षष्ठी का व्रत और पूजन करने से भक्तों को कई लाभ मिलते हैं:

  • संतान प्राप्ति: यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे संतान षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है।
  • सुख-समृद्धि और सौभाग्य: भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और सफलता की प्राप्ति होती है।
  • विजय और आत्मबल: यह दिन विजय और शक्ति का दिन माना जाता है। पूजा से जीवन में मजबूती और आत्मबल आता है।
  • रोग निवारण: मान्यता है कि स्कंद षष्ठी की उपासना से च्यवन ऋषि को आँखों की ज्योति प्राप्त हुई थी, और इस व्रत की कृपा से मृत शिशु भी जीवित हो जाता है।

 पूजन विधि (Puja Vidhi)

स्कंद षष्ठी का व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है।

  1. व्रत संकल्प: सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर की साफ-सफाई करें और व्रत का संकल्प लें।
  2. स्थापना: पूजा घर में भगवान कार्तिकेय (स्कंद), शिव जी, और माता गौरी (पार्वती) की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  3. पूजा सामग्री: पूजन सामग्री (जल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, चंदन, अक्षत, हल्दी, कलावा, मौसमी फल, फूल, मेवा, धूप, दीपक) तैयार करें।
  4. स्नान: भगवान कार्तिकेय को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर का मिश्रण) से स्नान कराएँ।
  5. अर्पण: उन्हें नए वस्त्र पहनाएँ, कमल का फूल अर्पित करें (इसे शुभ माना जाता है), धूप-दीप जलाएँ और भोग लगाएँ। भोग में सात्विक मिठाई (जैसे खीर या फल) शामिल करें।
  6. अखंड दीपक: इस दिन स्कंद देव की स्थापना करके अखंड दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
  7. पाठ और आरती: स्कंद षष्ठी व्रत कथा पढ़ें या सुनें, और अंत में भगवान कार्तिकेय की आरती करें।
  8. दान: इस दिन दान करना भी शुभ माना जाता है।
  9. नियम: व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें और तामसिक भोजन (जैसे मांस, शराब, प्याज, लहसुन) का सेवन न करें।

मुरुगन स्वामी की जय

 

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