कालाष्टमी व्रत 2026: जनवरी से दिसम्बर तक पूरी सूची
जानें कथा, पूजा विधि, महत्व और कालाष्टमी व्रत से दूर होती हैं सभी बाधाएं और भय
कालाष्टमी व्रत जनवरी
शनिवार, 10 जनवरी 2026 (माघ, कृष्ण अष्टमी) ।
तिथि प्रारम्भ: 10 जनवरी 2026, प्रातः 08:23 बजे तिथि समाप्त: 11 जनवरी 2026, प्रातः 10:20 बजे
कालाष्टमी व्रत फ़रवरी
सोमवार, 9 फरवरी 2026 (फाल्गुन, कृष्ण अष्टमी) ।
तिथि प्रारम्भ: 9 फरवरी 2026, प्रातः 05:01 बजे । तिथि समाप्त: 10 फरवरी 2026, प्रा 07:27 बजे ।
कालाष्टमी व्रत मार्च
बुधवार, 11 मार्च 2026 (चैत्र, कृष्ण अष्टमी) ।
तिथि प्रारम्भ: 11 मार्च 2026, रात्रि 01:54 बजे । तिथि समाप्त: 12 मार्च 2026, प्रातः 04:19 बजे ।
कालाष्टमी व्रत अप्रैल
शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 (वैशाख, कृष्ण अष्टमी) ।
तिथि प्रारम्भ: 9 अप्रैल 2026, रात्रि 09:19 बजे । तिथि समाप्त: 10 अप्रैल 2026, रात्रि 11:15 बजे ।
कालाष्टमी व्रत मई
शनिवार, 9 मई 2026 (ज्येष्ठ, कृष्ण अष्टमी) ।
तिथि प्रारम्भ: 9 मई 2026, दोपहर 02:02 बजे । तिथि समाप्त: 10 मई 2026, दोपहर 03:06 बजे ।
अधिक कालाष्टमी व्रत जून
सोमवार, 8 जून 2026 (ज्येष्ठ, कृष्ण अष्टमी) ।
तिथि प्रारम्भ: 8 जून 2026, प्रातः 03:24 बजे । तिथि समाप्त: 9 जून 2026, प्रातः 03:23 बजे ।
कालाष्टमी व्रत जुलाई
मंगलवार, 7 जुलाई 2026 (आषाढ़, कृष्ण अष्टमी) ।
तिथि प्रारम्भ: 7 जुलाई 2026, दोपहर 01:24 बजे । तिथि समाप्त: 8 जुलाई 2026, दोपहर 12:21 बजे ।
कालाष्टमी व्रत अगस्त
बुधवार, 5 अगस्त 2026 (श्रावण, कृष्ण अष्टमी) ।
तिथि प्रारम्भ: 5 अगस्त 2026, रात्रि 08:42 बजे । तिथि समाप्त: 6 अगस्त 2026, सायं 06:52 बजे ।
कालाष्टमी व्रत सितम्बर
शुक्रवार, 4 सितम्बर 2026 (भाद्रपद, कृष्ण अष्टमी)
तिथि प्रारम्भ: 4 सितम्बर 2026, रात्रि 02:25 बजे । तिथि समाप्त: 5 सितम्बर 2026, रात्रि 12:13 बजे
कालाष्टमी व्रत अक्टूबर
शनिवार, 3 अक्टूबर 26 (आश्विन, कृष्ण अष्टमी)
तिथि प्रारम्भ: 3 अक्टूबर 2026, प्रातः 07:59 बजे तिथि समाप्त: 4 अक्टूबर 2026, प्रातः 05:51 बजे
कालाष्टमी व्रत नवम्बर
रविवार, 1 नवम्बर 2026 (कार्तिक, कृष्ण अष्टमी)
तिथि प्रारम्भ: 1 नवम्बर 2026, दोपहर 02:51 बजे तिथि समाप्त: 2 नवम्बर 2026, दोपहर 01:10 बजे
कालभैरव जयन्ती / कालाष्टमी व्रत दिसम्बर
मंगलवार, 1 दिसम्बर 26 (मार्गशीर्ष, कृष्ण अष्टमी)
तिथि प्रारम्भ: 1 दिसम्बर 2026, रात्रि 12:11 बजे । तिथि समाप्त: 1 दिसम्बर 2026, रात्रि 11:13 बजे
कालाष्टमी व्रत दिसम्बर
बुधवार, 30 दिसम्बर 2026 (पौष, कृष्ण अष्टमी) ।तिथि प्रारम्भ: 30 दिसम्बर 2026, दोपहर 12:36 बजे । तिथि समाप्त: 31 दिसम्बर 2026, दोपहर 12:32 बजे ।
कालाष्टमी व्रत क्या है?
कालाष्टमी वह पवित्र तिथि है जो भगवान शिव के अत्यंत उग्र और शक्तिशाली स्वरूप काल भैरव को समर्पित है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी (या काल भैरवाष्टमी) के रूप में मनाया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण कालाष्टमी मार्गशीर्ष (अगहन) मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है, जिसे काल भैरव जयंती के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान काल भैरव का प्राकट्य हुआ था। इस दिन मुख्य रूप से तंत्र-मंत्र के साधक और सामान्य भक्त भय, कष्टों, शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति पाने के लिए काल भैरव की पूजा करते हैं।
काल भैरव के प्राकट्य की कथा
कालाष्टमी का महत्व सीधे तौर पर काल भैरव की उत्पत्ति की कथा से जुड़ा हुआ है।
एक पौराणिक कथा के अनुसार:
एक बार ब्रह्मा और विष्णु जी के बीच इस बात पर विवाद हुआ कि उन दोनों में से सबसे श्रेष्ठ कौन है। जब अन्य देवताओं और ऋषियों ने विचार-विमर्श करके भगवान शिव को परम श्रेष्ठ माना, तो ब्रह्मा जी इस फैसले से सहमत नहीं हुए। अहंकारवश उन्होंने भगवान शिव की वेशभूषा और उनके गणों की रूप-सज्जा का तिरस्कार किया और उनके प्रति अपमानजनक शब्द कहे। ब्रह्मा जी के इस आचरण से भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे। शिव का क्रोध इतना प्रचंड और विकराल था कि उसी क्षण उनके शरीर से एक तेजस्वी और भयंकर शक्ति प्रकट हुई। यही शक्ति काल भैरव कहलाई, जिनका उद्देश्य ब्रह्मा जी के अहंकार को समाप्त करना था। काल भैरव ने क्रोध में आकर अपने बाएं हाथ की कनिष्ठा (सबसे छोटी) उंगली के नाखून से ब्रह्मा जी के पाँचवें सिर को काट दिया। ब्रह्मा के सिर को काटने के कारण, काल भैरव पर ब्रह्महत्या (ब्राह्मण की हत्या) का पाप लग गया। ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए काल भैरव को कई तीर्थ स्थानों पर भटकना पड़ा। अंततः, काशी नगरी में ही उनके हाथ से ब्रह्मा का कटा हुआ सिर (कपाल) गिर गया और उन्हें पाप से मुक्ति मिली। इस घटना के बाद, भगवान शिव ने काल भैरव को काशी में ही निवास करने और इस नगरी का कोतवाल (रक्षक) बनने का आदेश दिया।
भगवान काल भैरव की पूजा करने से जीवन में अनेक कल्याणकारी फल प्राप्त होते हैं। उनकी उपासना से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और व्यक्ति रोग, दोष और नकारात्मक शक्तियों से मुक्त होता है। भैरव देव अपने भक्तों की सदैव सुरक्षा करते हैं और दुष्कर्म करने वालों को दंड देते हैं। साथ ही, यह पूजा शनि और राहु के प्रकोप से रक्षा करती है तथा दुर्भाग्य को दूर कर सौभाग्य में वृद्धि लाती है
कालाष्टमी का महत्व
कालाष्टमी का महत्व हिंदू धर्म और विशेषकर शैव संप्रदाय में बहुत गहरा है।
- भय से मुक्ति: काल भैरव को दंडपाणि भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘दंड धारण करने वाला’। इनकी पूजा करने से व्यक्ति के मन से हर प्रकार का भय, अज्ञात डर और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
- शत्रु बाधा निवारण: यह पूजा शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और कानूनी मामलों में सफलता के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
- तंत्र साधना: यह रात्रि (विशेषकर काल भैरव जयंती की रात्रि) तंत्र साधना और गुप्त विद्याओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- काल के नियंत्रक: ‘काल’ का अर्थ है समय। काल भैरव समय को नियंत्रित करने वाले और जीवन के चक्र पर नियंत्रण रखने वाले देव हैं।
मान्यताएँ और पूजा विधि
- पूजा का समय: काल भैरव की पूजा मुख्य रूप से रात्रि के समय की जाती है, क्योंकि वे भगवान शिव के तामसिक (उग्र) स्वरूप हैं।
- व्रत और भोग: भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और काल भैरव को सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं। उन्हें काले तिल, पुए, उड़द दाल की पकौड़ी, और दूध का भोग लगाया जाता है।
- श्मशान में पूजा: कई साधक श्मशान घाट (श्मशान भैरव के रूप में) या सुनसान स्थानों पर जाकर विशेष पूजा और साधना करते हैं।
- कुत्ते को भोजन: काल भैरव का वाहन श्वान (कुत्ता) है। इसलिए इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना या उसकी सेवा करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे काल भैरव प्रसन्न होते हैं।
- मंत्र जाप: इस दिन “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय ह्रीं” या “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जाप करना फलदायी होता है।
कालाष्टमी 2026 – FAQs
प्रश्न 1: ज्येष्ठ मास कालाष्टमी 2026 कब है?
उत्तर 1: ज्येष्ठ मास की कालाष्टमी शनिवार, 09 मई 2026 को मनाई जाएगी। यह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है।
प्रश्न 2: अष्टमी तिथि का समय क्या है?
उत्तर 2: अष्टमी तिथि 09 मई 2026 को दोपहर 02:02 बजे से प्रारंभ होकर 10 मई 2026 को दोपहर 03:06 बजे तक रहेगी।
प्रश्न 3: कालाष्टमी व्रत क्या है?
उत्तर 3: कालाष्टमी भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित व्रत है, जो हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है।
प्रश्न 4: काल भैरव कौन हैं?
उत्तर 4: काल भैरव भगवान शिव का अत्यंत शक्तिशाली और रक्षक स्वरूप हैं, जिन्हें काशी का कोतवाल भी माना जाता है।
प्रश्न 5: कालाष्टमी का महत्व क्या है?
उत्तर 5: इस व्रत से भय, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुरक्षा और साहस बढ़ता है।
प्रश्न 6: कालाष्टमी पर क्या करना चाहिए?
उत्तर 6: इस दिन व्रत रखें, रात्रि में काल भैरव की पूजा करें, सरसों के तेल का दीपक जलाएं और मंत्र जाप करें।
प्रश्न 7: कालाष्टमी पर क्या भोग लगाना चाहिए?
उत्तर 7: काल भैरव को काले तिल, उड़द दाल, पुए, दूध आदि का भोग लगाया जाता है।
प्रश्न 8: कालाष्टमी पर कुत्ते को भोजन क्यों कराया जाता है?
उत्तर 8: कुत्ता काल भैरव का वाहन माना जाता है, इसलिए इस दिन कुत्ते को भोजन कराने से भगवान भैरव प्रसन्न होते हैं।
प्रश्न 9: कालाष्टमी के दिन कौन सा मंत्र जाप करें?
उत्तर 9: इस दिन “ॐ कालभैरवाय नमः” या “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय ह्रीं” मंत्र का जाप करना शुभ होता है।
प्रश्न 10: काल भैरव जयंती कब होती है?
उत्तर 10: मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव जयंती मनाई जाती है, जिसे सबसे महत्वपूर्ण कालाष्टमी माना जाता है।
।। हर हर महादेव ।।
