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पौष मास 2026-2027: प्रारम्भ, समाप्ति, व्रत-त्योहार और धार्मिक महत्व

पौष मास का प्रारम्भ गुरुवार, 24 दिसम्बर 2026 से होगा और इसका समापन शुक्रवार, 22 जनवरी 2027 को होगा।

पौष मास (Paush Month), हिंदू पंचांग का दसवां महीना है। इसे लोकभाषा में पूस का महीना भी कहा जाता है। यह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार आमतौर पर दिसंबर-जनवरी के बीच आता है, जब उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी पड़ती है।

इस महीने का नाम ‘पौष’ इसलिए पड़ा क्योंकि इसकी पूर्णिमा को चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में होता है।

धार्मिक दृष्टि से इस महीने को छोटा पितृ पक्ष और खरमास (Kharmas) भी कहा जाता है।

यहाँ पौष मास की कथा, महत्व और मान्यताओं का विस्तृत विवरण है:

पौष मास 2026-2027 में भगवान विष्णु और सूर्यदेव की पूजा, मंदिर में दीपदान, पवित्र स्नान

पौष मास क्या है? (विशेषता: खरमास)

पौष मास को सूर्य देव की उपासना और पितरों की शांति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

  • देवता: इस महीने में सूर्य देव के भग स्वरूप की पूजा की जाती है।
  • खरमास/मलमास: ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि (Jupiter’s sign) में प्रवेश करते हैं, तो पौष का महीना शुरू होता है। देवताओं के गुरु बृहस्पति की राशि में सूर्य के आने से सभी शुभ कार्य (विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश) वर्जित हो जाते हैं। इसे ‘खरमास’ कहते हैं।

पौराणिक कथा (खरमास क्यों लगता है?)

पौष मास को ‘खरमास’ क्यों कहते हैं और इसमें शुभ कार्य क्यों बंद हो जाते हैं, इससे जुड़ी एक बहुत रोचक कथा है:

कथा: सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा लगाते हैं। उन्हें कहीं भी रुकने की इजाजत नहीं है, क्योंकि अगर सूर्य रुक गया तो सृष्टि का विनाश हो जाएगा। लगातार चलते रहने के कारण, सर्दी के दिनों में (पौष मास में) सूर्य देव के घोड़े बहुत थक गए और उन्हें प्यास लगी। घोड़ों की हालत देखकर सूर्य देव का मन द्रवित हो गया। वे उन्हें पानी पिलाने के लिए एक तालाब के किनारे ले गए।

लेकिन शर्त यह थी कि रथ रुकना नहीं चाहिए। तभी सूर्य देव ने देखा कि तालाब के किनारे दो खर (गधे) खड़े हैं। सूर्य देव ने अपने थक चुके घोड़ों को आराम करने के लिए छोड़ दिया और रथ में उन गधों (Donkeys) को जोत दिया।

 

धीमी गति: अब चूंकि घोड़े तो घोड़े हैं और गधे गधे हैं, इसलिए सूर्य के रथ की गति बहुत धीमी हो गई। सूर्य का तेज कम हो गया (यही कारण है कि पौष में धूप में गर्मी कम होती है)। पूरे एक महीने तक गधे रथ खींचते रहे। जब मकर संक्रांति आई, तब तक घोड़े आराम कर चुके थे। सूर्य देव ने वापस घोड़ों को रथ में जोता और तब जाकर उनकी गति और तेज बढ़ा। चूंकि इस महीने में सूर्य के रथ को ‘खर’ (गधे) खींचते हैं, इसलिए इसे खरमास कहते हैं और इसमें शुभ कार्य (शादी-ब्याह) नहीं होते, क्योंकि सूर्य कमजोर होता है।

 

पौष मास का महत्व (Significance)

  1. सूर्य उपासना: ठंड के कारण शरीर में ऊर्जा कम होती है। इस महीने में सूर्य की पूजा करने से स्वास्थ्य, लंबी उम्र और तेज प्राप्त होता है।
  2. पितृ मुक्ति: इस महीने को ‘छोटा पितृ पक्ष’ कहा जाता है। मान्यता है कि पौष मास में पितरों के लिए किया गया पिंडदान और तर्पण उन्हें सीधे बैकुंठ पहुंचाता है।
  3. अध्यात्म का महीना: चूंकि इसमें विवाह आदि के शोर-शराबे नहीं होते, इसलिए यह महीना केवल भक्ति, सत्संग और दान के लिए बना है।

पौष मास की प्रमुख मान्यताएं और नियम (क्या करें, क्या न करें)

इस पावन महीने में शुभ फलों की प्राप्ति और दोषों के शमन के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं:

 

पौष मास में क्या करें? (शुभ कार्य)

  • सूर्य देव को अर्घ्य: प्रतिदिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल रोली, लाल पुष्प और अक्षत (चावल) डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें और ‘ॐ सूर्याय नम:’ का जाप करें।
  • तिल और गर्म वस्त्रों का दान: पौष मास में कड़ाके की ठंड होती है। इसलिए गरीबों को कंबल, ऊनी वस्त्र, गुड़, और तिल का दान करना महापुण्य माना गया है।
  • गीता का पाठ: यह महीना भगवान विष्णु की आराधना का भी है। इस मास में श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करने से मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • लाल और पीले रंग का प्रयोग: इस पूरे महीने लाल और पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये रंग सूर्य और बृहस्पति के प्रतीक हैं।

पौष मास में क्या न करें? (वर्जित कार्य)

  • मांगलिक कार्यों की मनाही: इस महीने में विवाह, सगाई, मुंडन, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश और नया व्यापार शुरू करना पूर्णतः वर्जित होता है।
  • तामसिक भोजन से बचें: पौष मास में मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • नमक का कम प्रयोग: रविवार के दिन (जो सूर्य देव का दिन है) नमक का सेवन न करने या कम करने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है और सूर्य ग्रह मजबूत होता है।

पौष बड़ा (Paush Bada) उत्सव: राजस्थान और उत्तर भारत के कई मंदिरों में इस महीने भगवान को विशेष रूप से पौष बड़ा (दाल के पकौड़े और हलवा) का भोग लगाया जाता है। यह एक बड़ा उत्सव होता है।

 

निष्कर्ष

पौष मास (खरमास) हमें सिखाता है कि जीवन में कभी-कभी रुकना और ठहरना भी जरूरी है। जैसे सूर्य के घोड़े आराम करते हैं, वैसे ही यह महीना हमें बाहरी भागदौड़ रोककर आंतरिक शांति (भक्ति) पर ध्यान देने का अवसर देता है।

पौष मास के पावन अवसर पर भगवान श्रीहरि विष्णु और सूर्यदेव की कृपा से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का वास हो।

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

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