माँ बगलामुखी जयंती 2026: जानें तिथि, कथा, पूजा विधि
23 अप्रैल 2026 को रात्रि 8:49 बजे से प्रारंभ होकर 24 अप्रैल 2026 को शाम 7:21 बजे तक रहेगी।उदय तिथि के अनुसार 24 अप्रैल 2026 को ही बगलामुखी जयंती मनाई जाएगी।
क्या है माँ बगलामुखी जन्मोत्सव?
देवी बगलामुखी का जन्मोत्सव प्रतिवर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। उनका रंग पीला है और इसीलिए उन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है। उनकी पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल, पीला भोग और पीला आसन प्रयोग किया जाता है। वह अपने एक हाथ में शत्रुओं की जिह्वा (जीभ) पकड़े हुए हैं और दूसरे हाथ में गदा धारण करती हैं, जिसका प्रयोग वह शत्रु को स्तंभित करने के लिए करती हैं।
कथा (उत्पत्ति)
देवी बगलामुखी की उत्पत्ति की कथा इस प्रकार है:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में एक समय ऐसा आया जब पूरी सृष्टि पर एक विशाल तूफान आया। इस तूफान ने पूरी दुनिया को नष्ट करने का खतरा पैदा कर दिया था। देवताओं ने इस विनाशकारी तूफान को रोकने के लिए भगवान विष्णु का आह्वान किया। भगवान विष्णु ने सृष्टि को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए। अंततः, भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र (वर्तमान गुजरात) में हरिद्रा सरोवर (हल्दी या पीले रंग के जल का सरोवर) के निकट घोर तपस्या की। भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर, उस सरोवर से वैशाख शुक्ल अष्टमी के दिन, रात के समय, देवी बगलामुखी का प्राकट्य हुआ। देवी ने प्रकट होते ही अपनी स्तंभन शक्ति से उस प्रलयकारी तूफान को क्षण भर में शांत कर दिया और सृष्टि को विनाश से बचाया। तभी से उन्हें स्तंभन शक्ति की देवी कहा जाता है।
मदन असुर का स्तम्भन (शत्रु नाशिनी): असत्य और अधर्म का प्रचार करने वाले ‘मदन’ नामक असुर की जिह्वा (जीभ) पकड़कर माता ने उसे स्तंभित कर दिया। यह स्वरूप इस बात का प्रतीक है कि माता शत्रुओं की दुर्वाणी, कुतर्क और षड्यंत्रों का नाश करने वाली हैं।
महत्व और मान्यताएँ:
देवी बगलामुखी की पूजा विशेष रूप से कुछ विशेष उद्देश्यों की पूर्ति के लिए की जाती है:
- स्तंभन शक्ति: देवी की पूजा से साधक को शत्रु, विरोधी और प्रतिस्पर्धी की नकारात्मक गतिविधियों, वाणी और बुद्धि को स्तंभित (पंगु) करने की शक्ति प्राप्त होती है।
- वाद-विवाद में विजय: जो लोग कोर्ट-कचहरी के मामलों, वाद-विवाद, या शास्त्रार्थ में विजय प्राप्त करना चाहते हैं, वे देवी बगलामुखी की उपासना करते हैं।
- भय और तंत्र-बाधा से मुक्ति: यह माना जाता है कि देवी अपने भक्तों को हर प्रकार के भय, काले जादू (तंत्र-बाधा) और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
- पीला रंग (पीताम्बरा): पीला रंग बृहस्पति ग्रह से जुड़ा है, जो ज्ञान, समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। देवी की पूजा में पीले रंग का प्रयोग ज्ञान, बल और समृद्धि की प्राप्ति में सहायक होता है।
- मोक्ष और भोग: महाविद्या होने के कारण, देवी बगलामुखी अपने साधकों को भोग (सांसारिक सुख) और मोक्ष (परम ज्ञान) दोनों प्रदान करने में समर्थ हैं।
देवी माँ बगलामुखी (पीताम्बरा) की पूजा विधि:
देवी बगलामुखी की पूजा विशेष रूप से पीले रंग के उपयोग और स्तंभन शक्ति की प्राप्ति के लिए की जाती है। यह पूजा किसी विशेष कामना या शत्रु बाधा निवारण के लिए की जाती है।
प्रारंभिक तैयारी (संकल्प)
- तिथि: पूजा वैशाख शुक्ल अष्टमी (जन्मोत्सव) या किसी भी शुभ दिन की जा सकती है।
- स्नान और वस्त्र: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। पूजा करने वाले साधक को पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।
- स्थान: पूजा स्थल की सफाई करें और उसे गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
- आसन: पूजा के लिए पीले रंग के आसन का प्रयोग करें।
- संकल्प: हाथ में जल, पीले फूल, अक्षत और दक्षिणा लेकर अपनी मनोकामना (जैसे शत्रु बाधा से मुक्ति, वाद-विवाद में विजय) कहते हुए पूजा का संकल्प लें।
प्रतिमा और कलश स्थापना
- प्रतिमा/चित्र: देवी बगलामुखी की प्रतिमा या चित्र को एक चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित करें।
- कलश स्थापना: चौकी के पास मिट्टी के कलश में जल भरकर, उस पर आम के पत्ते और नारियल रखें। कलश पर स्वास्तिक बनाएं।
- दीपक: घी का दीपक प्रज्वलित करें। ध्यान रखें कि दीपक की लौ शांत न हो।
षोडशोपचार पूजा (पीले तत्वों का प्रयोग)
पूजा के दौरान सभी सामग्री पीली या पीले रंग में रंगी होनी चाहिए:
सामग्री का नाम | विवरण |
चंदन/रोली | देवी को पीला चंदन या हल्दी का तिलक लगाएं। |
पुष्प | पीले रंग के फूल (गेंदा, चंपा, या पीले गुलाब) और माला अर्पित करें। |
अक्षत | साबुत चावल को हल्दी से पीला करके चढ़ाएं। |
भोग (नैवेद्य) | पीले रंग की मिठाई (जैसे बेसन के लड्डू, बूंदी, या पीले फल) का भोग लगाएं। |
हवन | यदि संभव हो, तो हवन कुंड में हल्दी की लकड़ियों और सरसों के साथ आहुति दें। |
मंत्र जाप और माला
- माला: मंत्र जाप के लिए हल्दी की माला (हल्दी की गांठों से बनी माला) का प्रयोग करें।
- जाप संख्या: अपनी श्रद्धा या संकल्प अनुसार मंत्र का जाप करें। यह जाप 5, 7, 11, या 21 माला तक हो सकता है।
- मूल मंत्र: देवी बगलामुखी का बीज मंत्र है:
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।
(अर्थात: हे देवी बगलामुखी, सभी दुष्टों की वाणी, मुख और पदों को स्तम्भित करो, उनकी जिह्वा को कीलित करो और उनकी बुद्धि का विनाश करो।)
आरती और समापन
- आरती: देवी बगलामुखी की आरती कपूर या घी के दीपक से करें।
- क्षमा प्रार्थना: पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
- प्रसाद: पीला भोग प्रसाद के रूप में वितरित करें।
ध्यान दें: बगलामुखी की पूजा एक उग्र (तीव्र) पूजा मानी जाती है। इसलिए इसे हमेशा किसी योग्य गुरु या जानकार पुरोहित के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए।
|| जय माँ बगलामुखी ||

Jai mata di
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