अधिक ज्येष्ठ मास की स्कंद षष्ठी: भगवान कार्तिकेय और श्रीहरि की संयुक्त कृपा
वर्ष 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास की स्कन्द षष्ठी 21 मई, बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। यह तिथि भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) को समर्पित होती है।
षष्ठी तिथि प्रारंभ: 21 मई 2026 को सुबह 08:26 बजे से
षष्ठी तिथि समाप्त: 22 मई 2026 को सुबह 06:24 बजे तक
स्कन्द षष्ठी भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) की उपासना का विशेष दिन है। इस दिन व्रत और पूजा करने से भक्तों को साहस, शक्ति और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। मान्यता है कि भगवान स्कन्द की कृपा से जीवन के सभी बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के मार्ग खुलते हैं।
सनातन धर्म में ‘स्कंद षष्ठी’ भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) के अवतरण और उनके शौर्य का पर्व है। लेकिन जब यह पवित्र तिथि ‘अधिक मास‘ (पुरुषोत्तम मास) और वह भी ‘ज्येष्ठ महीने‘ में आती है, तो इसका आध्यात्मिक महत्व पूरी तरह से बदल जाता है। यह एक ऐसा दुर्लभ खगोलीय और धार्मिक संयोग है, जो हर तीन साल में एक बार बनता है।
ज्येष्ठ का महीना सूर्य के प्रचंड ताप (गर्मी) का प्रतीक है, भगवान कार्तिकेय मंगल (अग्नि) के स्वामी हैं, और अधिक मास भगवान विष्णु (शांति और शीतलता) का महीना है। आइए जानते हैं कि इस अद्भुत त्रिवेणी (अग्नि, ताप और शांति) का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है और इस विशेष दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा का बिल्कुल नया विधान क्या है।
अधिक ज्येष्ठ मास और स्कंद षष्ठी का ‘आध्यात्मिक विज्ञान‘
इस महासंयोग को समझने के लिए इसके तीन मुख्य तत्वों को समझना होगा:
- ज्येष्ठ मास की ऊर्जा: यह हिंदू कैलेंडर का वह समय है जब गर्मी अपने चरम पर होती है। यह प्रकृति में ‘अग्नि तत्व’ (Fire Element) के बढ़ने का समय है, जो मनुष्य के भीतर क्रोध, चिड़चिड़ापन और शारीरिक बीमारियां (जैसे डिहाइड्रेशन या पित्त दोष) पैदा करता है।
- स्कंद षष्ठी (भगवान कार्तिकेय): शिव के तेज से जन्मे भगवान कार्तिकेय स्वयं अग्नि और ऊर्जा के प्रतीक हैं। वे देव सेनापति हैं जो साहस तो देते हैं, लेकिन उनकी ऊर्जा अत्यंत उग्र होती है।
- अधिक मास (भगवान विष्णु): अधिक मास श्रीहरि विष्णु का समय है, जो ‘जल तत्व’ और ‘पालन’ के देवता हैं। वे परम शांत हैं।
अधिक ज्येष्ठ मास की स्कंद षष्ठी का अर्थ है- “प्रचंड ऊर्जा (कार्तिकेय) और भीषण ताप (ज्येष्ठ) को भगवान विष्णु (अधिक मास) की शीतलता और विवेक से संतुलित करना।” यह दिन मनुष्य को सिखाता है कि अपनी उग्रता और क्रोध को सही दिशा में कैसे मोड़ें।
इस स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व और लाभ
अधिक ज्येष्ठ मास में आने वाली इस षष्ठी का व्रत करने से साधक को कुछ ऐसे लाभ मिलते हैं, जो सामान्य दिनों में संभव नहीं हैं:
- संतान के स्वास्थ्य की रक्षा: ज्येष्ठ की गर्मी में बच्चों को मौसमी बीमारियां जल्दी घेरती हैं। इस दिन व्रत रखने से भगवान कार्तिकेय (जिन्हें बालकों का रक्षक माना गया है) संतान को गंभीर रोगों से बचाते हैं।
- पित्त और रक्त दोष से मुक्ति: आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और कार्तिकेय की उपासना करने से शरीर का पित्त दोष शांत होता है और ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) जैसी समस्याएं नियंत्रित होती हैं।
- अहंकार और ‘बर्नआउट‘ (Burnout) से बचाव: आज के समय में अत्यधिक काम के कारण लोग मानसिक रूप से थक (Burnout) जाते हैं। यह व्रत मष्तिष्क को शीतलता प्रदान करता है और डिप्रेशन को दूर करता है।
- दोगुना पुण्य: अधिक मास में किए गए किसी भी व्रत का फल दस गुना हो जाता है। इसलिए इस षष्ठी का व्रत जीवन भर की गई पूजाओं के बराबर फल देता है।
ग्रीष्म ऋतु के अनुसार विशेष पूजा विधि
इस विशिष्ट षष्ठी की पूजा में अग्नि या उग्र वस्तुओं का प्रयोग कम किया जाता है और शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं का प्रयोग अधिक होता है:
- चंदन का लेप: घर के मंदिर में भगवान कार्तिकेय और विष्णु जी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें। भगवान कार्तिकेय को लाल चंदन और विष्णु जी को पीला चंदन अवश्य लगाएं। यह उनके उग्र स्वरूप को शांत करता है।
- शीतल जल से अभिषेक: यदि आपके पास भगवान कार्तिकेय या शालिग्राम की मूर्ति है, तो उनका अभिषेक गंगाजल में गुलाब जल (Rose Water) मिलाकर करें।
- विशेष नैवेद्य (भोग): ज्येष्ठ मास की गर्मी को देखते हुए भगवान को ठंडी तासीर वाली चीजों का भोग लगाएं। जैसे— खरबूजा, तरबूज, ठंडी खीर, पंचामृत या जलजीरा/शर्बत।
- संयुक्त मंत्र जाप:
- पहले विष्णु मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (1 माला)
- फिर कार्तिकेय मंत्र: ॐ स्कंदाय कार्तिकेयाय नमः (1 माला)
अधिक ज्येष्ठ स्कंद षष्ठी के 3 अचूक उपाय (महादान)
चूंकि यह अधिक मास है, इसलिए इस दिन किए गए दान का विशेष महत्व है:
- जल दान (Water Donation): किसी मंदिर, चौराहे या सार्वजनिक स्थान पर मिट्टी के घड़े (मटके) में पानी भरकर दान करें। इसके साथ राहगीरों को शर्बत पिलाएं। यह कार्तिकेय और विष्णु दोनों को सर्वाधिक प्रिय है।
- वृक्षारोपण: इस दिन नीम, पीपल या बरगद का पौधा अवश्य लगाएं। ज्येष्ठ मास में लगाया गया पेड़ पीढ़ियों तक पुण्य देता है।
- छाते और जूते का दान: दोपहर की भीषण गर्मी से बचने के लिए किसी जरूरतमंद को छाता (Umbrella) या चप्पल/जूते दान करने से जीवन के सभी बड़े संकट कट जाते हैं।
मुख्य नियम (क्या न करें)
- गर्म और तामसिक भोजन वर्जित: इस दिन शरीर में पहले से ही अग्नि तत्व बढ़ा होता है। अतः मांस, मदिरा, अत्यधिक मिर्च-मसाले, लहसुन और प्याज का सेवन भूलकर भी न करें।
- क्रोध पर नियंत्रण: भगवान कार्तिकेय युद्ध के देवता हैं, लेकिन अधिक मास शांति का प्रतीक है। इस दिन किसी पर भी क्रोध करना या अपशब्द कहना व्रत के फल को तुरंत नष्ट कर देता है।
निष्कर्ष
अधिक ज्येष्ठ मास की स्कंद षष्ठी केवल एक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के बदलते मौसम और हमारे शरीर की ऊर्जा के बीच संतुलन बनाने का एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तरीका है। जब हम ज्येष्ठ की तपती दोपहरी में भगवान कार्तिकेय के शौर्य को श्रीहरि विष्णु की शीतलता के साथ पूजते हैं, तो हमारे भीतर का हर मानसिक और शारीरिक विकार जलकर भस्म हो जाता है, और जीवन में असीम शांति का उदय होता है।
|| जय कार्तिकेय भगवान ||
