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आरती और चालीसा

आरती क्या है?

‘आरती’ संस्कृत शब्द “आरात्रिक” या “आर्तिका” से बना है। यह  केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि भक्त के हृदय से निकली हुई प्रेम और श्रद्धा की अभिव्यक्ति है। जब हम किसी देवी-देवता की पूजा करते हैं, तो अंत में आरती के माध्यम से हम अपने भाव, अपनी कृतज्ञता (gratitude) और अपनी भक्ति उन्हें अर्पित करते हैं। 

‘स्कन्द पुराण’ में कहा गया है कि यदि पूजा में किसी प्रकार की कमी रह जाए – मंत्रों में त्रुटि हो, विधि अधूरी रह जाए – तो भी आरती करने से वह पूजा पूर्ण हो जाती है। आरती एक ऐसी ज्योति है, जो हमारी सभी कमियों को दूर करके भगवान तक हमारी सच्ची भावना पहुंचा देती है।

इस प्रकार से, आरती- पूजा के अन्त में देवी या देवता की प्रसन्नता हेतु की जाने वाली अर्चना है जिसमें उस देवी या देवता के समक्ष, अग्नि (ज्योति) को प्रज्ज्वलित करके उनका स्तवन (गुणकीर्तन) किया जाता है।

 

चालीसा क्या है?

चालीसा (Chalisa) हिंदू धर्म में किसी देवी या देवता की स्तुति (प्रशंसा) और प्रार्थना में गाई जाने वाली एक काव्यात्मक रचना या भजन है।

 “चालीसा” शब्द हिंदी के शब्द “चालीस” (Forty) से बना है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक चालीसा में मुख्य रूप से 40 चौपाइयां (verses) होती हैं। इन 40 मुख्य चौपाइयों के अलावा, चालीसा के शुरू और अंत में अक्सर कुछ ‘दोहे’ भी शामिल होते हैं। (उदाहरण के लिए, हनुमान चालीसा की शुरुआत में 2 दोहे और अंत में 1 दोहा होता है)। वेदों और पुराणों के कठिन संस्कृत श्लोकों के विपरीत, चालीसा को बहुत ही सरल भाषा (जैसे अवधी या हिंदी) में लिखा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि आम लोग भी इसे आसानी से पढ़ और समझ सकें। भक्त इसे नियमित रूप से अपने इष्ट देव का आशीर्वाद पाने, मन की शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन की कठिनाइयों (संकट) को दूर करने के लिए पढ़ते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो, यह 40 पंक्तियों की एक बहुत ही लोकप्रिय और भक्तिमय प्रार्थना है जिसे ईश्वर से जुड़ने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए गाया जाता है।

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